- IRCTC घोटाला: दिल्ली हाईकोर्ट में CBI ने दिया हलफनामा, कहा- आरोप तय होने को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज हों
- सॉलिसिटर जनरल डी.पी. सिंह की दलील- भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा-19 के तहत मंजूरी का पेंच फंसाना गलत
- पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल की राय का भी दिया हवाला; कहा- मामला लंबा खिंचने से मंजूरी में लगा वक्त
द वॉयस ऑफ बिहार (नई दिल्ली/पटना)
जमीन के बदले नौकरी (Land for Job) और आईआरसीटीसी (IRCTC) घोटाले में फंसे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बुधवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए दो टूक कहा कि यादव परिवार इस मामले में सुनवाई (Trial) से बच नहीं सकता है।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि जब निचली अदालत (Sessions Court) ने इस मामले में संज्ञान लिया था, तब भले ही मुकदमा चलाने की मंजूरी (Sanction) की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन अब आरोपी इसे आधार बनाकर बच नहीं सकते।
क्या है CBI की दलील?
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के सामने जांच एजेंसी का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) डी.पी. सिंह ने कड़ी दलीलें पेश कीं।
- धारा-19 की मंजूरी का पेंच: उन्होंने कहा कि यादव परिवार पर मुकदमा चलाने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा-19 के तहत अलग से मंजूरी लेना इस चरण में अनिवार्य नहीं है।
- आरोप तय होने को चुनौती: दरअसल, हाईकोर्ट लालू, राबड़ी और तेजस्वी की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें उन्होंने अपने खिलाफ आरोप तय (Framing of Charges) किए जाने को चुनौती दी है। सीबीआई ने इन याचिकाओं का कड़ा विरोध किया है।
पूर्व अटॉर्नी जनरल की राय का दिया हवाला
सीबीआई ने कोर्ट में बताया कि इस मामले में मार्च-2020 में भारत के तत्कालीन अटॉर्नी जनरल (AG) के.के. वेणुगोपाल ने भी स्पष्ट राय दी थी कि मुकदमा चलाया जा सकता है।
- सिंह ने आगे कहा कि चूंकि यह मामला काफी लंबा खिंच रहा है, इसलिए चार्जशीट दायर होने के बाद मंजूरी (Sanction) लेने में थोड़ा समय लगा, लेकिन यह प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे आधार बनाकर आरोपी राहत की मांग नहीं कर सकते।
क्या है IRCTC घोटाला?
यह मामला तब का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि उस दौरान आईआरसीटीसी के होटलों के आवंटन और रखरखाव का ठेका देने में गड़बड़ी की गई और इसके बदले में पटना के बेली रोड पर कीमती जमीन ली गई। सीबीआई का कहना है कि अब इस मामले में कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है और जल्द ही कोर्ट आरोप तय करने पर फैसला ले सकती है।


