- सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक, चलाया जाएगा सदस्यता अभियान
- किसानों को मिलेगी आधुनिक तकनीक, जैविक उत्पादों को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक होगी पहुंच
- सहकारिता से समृद्धि: रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों की आय में होगी स्थायी वृद्धि
द वॉयस ऑफ बिहार (पटना)
बिहार के किसानों की आय बढ़ाने और राज्य के सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य की सभी सहकारी समितियों को अब केंद्र सरकार द्वारा स्थापित नई राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं— NCOL, NCEL और BBSSL से जोड़ा जाएगा। बुधवार (11 फरवरी) को सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार की अध्यक्षता में हुई एक अहम उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस दिशा में सदस्यता अभियान तेज करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प को उतारेंगे धरातल पर
समीक्षा बैठक के दौरान सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि नई राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं में सदस्यता लेने से बिहार की सहकारी समितियां विकास के नए आयाम स्थापित करेंगी।
- आत्मनिर्भरता की ओर कदम: मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन संस्थाओं से जुड़ने पर किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा।
- रोजगार के अवसर: सहकारी समितियों के सशक्त होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जो ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प को धरातल पर उतारने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
इस अहम बैठक में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह, सहयोग समितियों के निबंधक रजनीश कुमार सिंह और सभी नोडल पदाधिकारी मौजूद रहे। वहीं, सभी संयुक्त निबंधक और जिला सहकारिता पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए इस बैठक से जुड़े।
तीनों राष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़ने के क्या होंगे फायदे?
राज्य की सहकारी समितियों को मुख्य रूप से तीन राष्ट्रीय संस्थाओं से जोड़ा जा रहा है, जिनके लाभ इस प्रकार हैं:
- राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL): इससे जुड़ने पर राज्य में निर्मित जैविक उत्पादों (Organic Products) की सही तरीके से ब्रांडिंग, सर्टिफिकेशन (प्रमाणन) और मार्केटिंग हो सकेगी। राज्य के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी और किसानों को मुंहमांगा दाम मिलेगा।
- भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL): इस समिति से जुड़ने से राज्य के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। इससे कृषि उत्पादकता तो बढ़ेगी ही, साथ ही बिहार बीज के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनेगा।
- राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL): इसके जरिए बिहार की सहकारी समितियों और किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार (Global Market) तक सीधी पहुंच मिलेगी। कृषि उत्पादों के निर्यात में वृद्धि होने से किसानों को प्रतिस्पर्धी मूल्य मिलेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी।
वर्तमान स्थिति और सदस्यता शुल्क का पूरा गणित
वर्तमान में बिहार की 5406 सहकारी समितियां BBSSL में, 400 समितियां NCOL में और 436 समितियां NCEL में सदस्यता प्राप्त कर चुकी हैं। मंत्री ने बाकी बची समितियों को भी अभियान चलाकर जल्द से जल्द जोड़ने का निर्देश दिया है।
सदस्यता प्राप्त करने की शर्तें और शुल्क:
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संस्था का नाम |
शेयर का न्यूनतम क्रय |
शेयर की कुल राशि |
प्रवेश शुल्क (Entry Fee) |
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NCOL |
कम से कम 21 शेयर (₹1000 प्रति शेयर) |
₹21,000 |
₹500 |
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BBSSL |
कम से कम 1 शेयर (₹1000 प्रति शेयर) |
₹1,000 |
₹500 |
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NCEL |
कम से कम 1 शेयर (₹10,000 प्रति शेयर) |
₹10,000 |
(नोट: संबंधित संस्था में सदस्यता प्राप्त करने के लिए शेयर राशि के साथ प्रवेश शुल्क जमा करना अनिवार्य है।)


