सुरक्षा को लेकर सरकार सख्त: सभी DM और SP को जारी किया गया कड़ा निर्देश; विधान परिषद में गृह मंत्री ने दी जानकारी
वॉइस ऑफ बिहार (पटना)
बिहार के पंचायत प्रतिनिधियों (मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य आदि) की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। अब पंचायत के जनप्रतिनिधियों को अपनी सुरक्षा के लिए शस्त्र (हथियार) लाइसेंस बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। आवेदन करने के बाद एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर उन्हें शस्त्र लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा।
DM और SP को भेजा गया नया रिमाइंडर
उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को विधान परिषद में इस फैसले की आधिकारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को सख्त निर्देश भेजे गए हैं।
- पहला निर्देश: इस संबंध में 24 जून 2025 को निर्देश जारी किया गया था।
- नया रिमाइंडर: अधिकारियों की लेटलतीफी को खत्म करने के लिए 5 फरवरी 2026 को दोबारा निर्देश (रिमाइंडर) दिया गया है।
क्या होगी प्रक्रिया?
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि इच्छुक पंचायत प्रतिनिधियों को शस्त्र लाइसेंस के लिए एक निर्धारित प्रपत्र (फॉर्म) में आवेदन करना होगा। जिला प्रशासन (DM और SP) को स्पष्ट निर्देश है कि प्राप्त आवेदनों को लटकाया न जाए, बल्कि एक तय समय-सीमा के भीतर उन पर विचार कर योग्य जनप्रतिधियों को लाइसेंस निर्गत किया जाए।
विधान परिषद में उठा था मुद्दा:
दरअसल, निर्दलीय MLC महेश्वर सिंह ने पंचायत प्रतिनिधियों की सुरक्षा और शस्त्र लाइसेंस मिलने में हो रही देरी को लेकर विधान परिषद में एक गैर-सरकारी संकल्प पेश किया था। इसी संकल्प का विस्तार से जवाब देते हुए गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने सरकार के इस फैसले से सदन को अवगत कराया।
इस घोषणा के बाद पंचायत प्रतिनिधियों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से अपनी सुरक्षा को लेकर प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग कर रहे थे।


