पीरपैंती के पूर्व विधायक अमन पासवान जेल गए: 16 साल पुराने आचार संहिता मामले में कोर्ट का डंडा; सरेंडर के बाद भी नहीं मिली बेल

भागलपुर | कानून के हाथ कितने लंबे होते हैं और न्याय में भले देरी हो पर अंधेर नहीं, इसका उदाहरण पीरपैंती के पूर्व विधायक अमन कुमार पासवान और उनके सहयोगी हीरालाल पासवान के मामले में देखने को मिला। मंगलवार को एमपी-एमएलए (MP-MLA) कोर्ट ने आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के 16 साल पुराने एक मामले में दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

1. बिजली के खंभे पर पोस्टर लगाना पड़ा भारी

​यह मामला करीब डेढ़ दशक पुराना है, जब अमन कुमार पासवान जिला पार्षद हुआ करते थे।

  • फ्लैशबैक: घटना 9 सितंबर 2010 की है। अंतीचक थाने में तत्कालीन बीडीओ (BDO) सह सहायक निर्वाची पदाधिकारी के बयान पर यह एफआईआर दर्ज की गई थी।
  • आरोप: एफआईआर के मुताबिक, चुनाव प्रचार के दौरान बिजली के खंभे पर तत्कालीन जिला पार्षद अमन कुमार पासवान और एक अन्य जगह पर हीरालाल पासवान का राजनीतिक पोस्टर टंगा हुआ पाया गया था, जो आदर्श आचार संहिता (MCC) का सीधा उल्लंघन था।

2. ‘तारीख पे तारीख’ को हल्के में लिया, निकला वारंट

​पूर्व विधायक इस मामले की कानूनी प्रक्रिया को हल्के में ले रहे थे।

  • लापरवाही: कोर्ट ने सुनवाई और बयान दर्ज कराने के लिए तारीखें तय की थीं, लेकिन दोनों आरोपी जानबूझकर कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए।
  • सख्ती: कोर्ट के आदेशों की इस तरह अनदेखी करने पर, पिछले साल 24 दिसंबर को दोनों के खिलाफ गैरजमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी कर दिया गया। (इससे पहले 5 मई को भी इसी लापरवाही पर वारंट निकल चुका था)।

3. सरेंडर किया, लेकिन जज ने नहीं दी राहत

​गैरजमानती वारंट जारी होने के बाद मंगलवार को दोनों आरोपियों ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया।

  • झटका: आरोपियों के वकीलों ने बेल अर्जी (Bail Plea) दाखिल की, लेकिन एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष जज धर्मेंद्र कुमार पांडेय ने उसे तुरंत खारिज कर दिया।
  • जेल: कोर्ट ने मामले की गंभीरता और आरोपियों के पिछले रवैये को देखते हुए उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया और सीधे जेल भेज दिया।

निष्कर्ष: यह मामला नेताओं और जन प्रतिनिधियों के लिए एक बड़ा सबक है कि चुनाव के दौरान नियमों की अनदेखी और बाद में कोर्ट की प्रक्रिया से भागना बरसों बाद भी भारी पड़ सकता है।

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