नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार को न तो किसानों की चिंता है और न ही आम जनता की। सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन आज किसान बदहाल स्थिति में खड़े हैं।
‘अमेरिका से डील नहीं, ढील हुई’
भारत-अमेरिका के बीच हुई फ्री ट्रेड डील पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “यह डील नहीं, ढील है। अगर यही समझौता करना था तो 11 महीने इंतजार क्यों किया गया?”
उन्होंने पूछा कि सरकार ने कितने देशों से एफटीए किए और अब कितने देश बचे हैं। इतनी डील के बाद भी रुपया लगातार कमजोर क्यों हो रहा है?
अखिलेश ने आरोप लगाया कि यह समझौता एकतरफा है और इससे 500 बिलियन डॉलर का भारतीय बाजार खुल गया है। उन्होंने कहा, “आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी का नारा अब कहां गया?”
बजट को बताया दिशाहीन
सपा प्रमुख ने बजट को पूरी तरह दिशाहीन करार दिया। उन्होंने कहा—
- इस बजट में 2047 तक विकसित भारत बनाने का कोई स्पष्ट विजन नहीं है।
- पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के लिए कोई ठोस योजना नहीं लाई गई।
- नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 8% है, जबकि यह 12% होनी चाहिए थी।
- प्रति व्यक्ति आय करीब 3 हजार डॉलर है, फिर भी वैश्विक रैंकिंग में भारत 144वें स्थान पर क्यों है?
उन्होंने सवाल किया कि बीपीएल परिवारों की वास्तविक प्रति व्यक्ति आय क्या है, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।
यूपी के विकास पर भी उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि डबल इंजन सरकार के बावजूद राज्य के लिए बजट में कोई बड़ी योजना नहीं दिखती।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र के बजट से यूपी में एक भी नया एक्सप्रेसवे नहीं बना, जबकि हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
किसानों की हालत पर चिंता
अखिलेश यादव ने कहा कि फ्री ट्रेड डील के बाद विदेशी सामान बढ़ेगा तो भारतीय किसान क्या उगाएगा और क्या बेचेगा?
उन्होंने एमएसपी की कानूनी गारंटी न मिलने पर सरकार को घेरा और कहा—
- किसानों को खाद, बीज, बिजली और सस्ती सिंचाई नहीं मिल रही
- मंडियों में सरकारी खरीद लगभग ठप है
- सोने के दाम इतने बढ़ गए हैं कि गरीब बेटी की शादी में जेवर देना तो दूर, “लोहे पर पीतल चढ़ाकर भी विदाई मुश्किल हो जाएगी”
‘बजट में आम जनता का जिक्र ही नहीं’
अपने भाषण के अंत में सपा प्रमुख ने कहा कि इस बजट में आम आदमी का न जिक्र है, न फिक्र। सरकार ने किसानों और गरीबों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। यदि सच में चिंता होती तो खेती और रोजगार के लिए ठोस कदम उठाए जाते।


