बिहार में मेला आयोजन पर सख्त हुआ राजस्व विभाग, बिना स्वीकृति अतिरिक्त खर्च पर रोक

पटना: बिहार के विभिन्न जिलों में आयोजित होने वाले राजकीय घोषित और बिहार राज्य मेला प्राधिकार के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण मेलों के संचालन को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि मेला आयोजन से संबंधित राशि की मांग और व्यय पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार ही होंगे। बिना विभागीय स्वीकृति के अतिरिक्त खर्च कर किसी प्रकार की देनदारी पैदा करना मान्य नहीं होगा।


दो माह पहले भेजना होगा व्यय प्रस्ताव

विभाग के सचिव जय सिंह द्वारा जारी पत्र में पूर्व के आदेश पत्रांक-2894 (9), दिनांक 07.08.2025 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि—

  • मेला शुरू होने से कम से कम दो माह पूर्व
  • संबंधित जिला समाहर्ता को
  • संभावित मदवार व्यय विवरण के साथ
  • राशि आवंटन का प्रस्ताव विभाग को भेजना अनिवार्य होगा।

साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि विभाग द्वारा स्वीकृत राशि के भीतर ही पूरा आयोजन संपन्न कराया जाए।


देरी और बिना अनुमति खर्च पर नाराजगी

विभाग ने अपने पत्र में चिंता जताई है कि—

  • कई जिलों से राशि की मांग अत्यंत विलंब से भेजी जाती है,
  • कई बार बिना पूर्व स्वीकृति के ही खर्च कर दिया जाता है,
  • जिसके कारण संवेदकों द्वारा न्यायालय में वाद दायर करने की स्थिति बनती है,
  • और विभाग पर अनावश्यक वित्तीय भार पड़ता है।

इसे विभाग ने अनुचित परंपरा करार देते हुए तत्काल सुधार की आवश्यकता बताई है।


अतिरिक्त खर्च की जिम्मेदारी जिलों पर

स्पष्ट रूप से कहा गया है कि—

  • यदि विभाग कम राशि स्वीकृत करता है तो उसी सीमा में आयोजन होगा,
  • स्वीकृत राशि से अधिक व्यय पर कोई अतिरिक्त आवंटन नहीं मिलेगा,
  • ऐसी स्थिति में पूरी जिम्मेदारी संबंधित जिले की होगी।

इस संबंध में सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और अपर समाहर्ताओं को भी निर्देश भेजकर अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।


पारदर्शिता और अनुशासन सरकार की प्राथमिकता – विजय कुमार सिन्हा

उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा—

“राज्य में आयोजित होने वाले मेलों का सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन में विशेष महत्व है। इनका आयोजन पारदर्शी, अनुशासित और सुव्यवस्थित तरीके से हो—यह सरकार की प्राथमिकता है।”

उन्होंने जिलाधिकारियों से अपील की कि—

  • प्रस्ताव समय पर भेजें,
  • स्वीकृत बजट में ही खर्च करें,
  • बिना अनुमति किसी प्रकार की देनदारी उत्पन्न न करें।

मंत्री ने भरोसा जताया कि इन निर्देशों से मेला आयोजन जिम्मेदार, विवाद-रहित और जनहितकारी तरीके से संपन्न होंगे।


खास बातें एक नजर में

  • दो माह पहले भेजना होगा बजट प्रस्ताव
  • बिना स्वीकृति अतिरिक्त खर्च पर पूर्ण रोक
  • अधिक व्यय की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की
  • वित्तीय अनुशासन पर सरकार का विशेष जोर

 

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