
टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में 15 फरवरी को कोलंबो में प्रस्तावित भारत-पाकिस्तान महामुकाबले पर संकट अभी भी बना हुआ है। 1 फरवरी को पाकिस्तान सरकार ने टीम इंडिया के खिलाफ खेलने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद विवाद सुलझाने के लिए आईसीसी ने कूटनीतिक प्रयास तेज किए। इसी कड़ी में 8 फरवरी को आईसीसी उपाध्यक्ष इमरान ख्वाजा लाहौर पहुंचे और पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी के साथ लंबी बैठक की। बैठक में बांग्लादेश के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल भी मौजूद रहे।
PCB ने रखीं 4 बड़ी शर्तें
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भारत के खिलाफ खेलने के लिए आईसीसी के सामने चार प्रमुख शर्तें रखीं—
- भारत-पाक द्विपक्षीय सीरीज बहाल की जाए
पाकिस्तान ने मांग की कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से बंद द्विपक्षीय सीरीज फिर से शुरू हो और इसे न्यूट्रल वेन्यू पर आयोजित किया जाए। दोनों टीमों के बीच आखिरी द्विपक्षीय सीरीज 2012 में हुई थी। - ICC राजस्व में हिस्सेदारी बढ़ाई जाए
पीसीबी ने अपनी आय को ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बराबर करने की मांग रखी। - ‘नो हैंडशेक’ विवाद खत्म हो
एशिया कप 2025 के दौरान भारतीय खिलाड़ियों द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ न मिलाने के मुद्दे को सुलझाने की शर्त रखी गई। - बांग्लादेश को मुआवजा मिले
पाकिस्तान ने बांग्लादेश का समर्थन करते हुए ICC से उसे पूरा मुआवजा देने की मांग की।
ICC ने सभी शर्तें मानने से किया इनकार
सूत्रों के मुताबिक, आईसीसी ने पीसीबी की चारों मांगों को खारिज कर दिया है। आईसीसी का तर्क है कि—
- द्विपक्षीय सीरीज का फैसला संबंधित बोर्डों और सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है,
- राजस्व वितरण का मौजूदा ढांचा पहले से तय समझौतों के तहत है,
- हैंडशेक जैसे मुद्दे खेल भावना से जुड़े हैं, जिन पर आईसीसी हस्तक्षेप नहीं कर सकती,
- बांग्लादेश से जुड़ा मामला भी आईसीसी के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
क्या होगा भारत–पाक मुकाबले का भविष्य?
आईसीसी अब भी चाहता है कि टूर्नामेंट का सबसे बड़ा मुकाबला तय कार्यक्रम के अनुसार हो, क्योंकि इससे ब्रॉडकास्टिंग और स्पॉन्सरशिप को भारी फायदा होता है। वहीं पाकिस्तान सरकार अपने रुख पर कायम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान ने मैच का बहिष्कार किया तो—
- टीम पर आर्थिक प्रतिबंध लग सकते हैं,
- भविष्य के ICC टूर्नामेंट से बाहर होने का खतरा हो सकता है,
- PCB को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अब सबकी नजरें आईसीसी के अगले कदम और पाकिस्तान सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।


