बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के पांचवें दिन सोमवार को विधान परिषद की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संबोधन के दौरान विपक्ष ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी और मुख्यमंत्री के बीच तीखी बहस होने लगी, जिसके बाद सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
कानून-व्यवस्था पर विपक्ष का हंगामा
मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान विपक्षी सदस्य वेल में पहुंच गए और दरभंगा व खगड़िया में बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाओं को लेकर सरकार से जवाब मांगने लगे। राबड़ी देवी लगातार सवाल उठाती रहीं, जिस पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई और हंगामा कर रहे सदस्यों पर कार्रवाई की मांग की।
मुख्यमंत्री का पलटवार
हंगामे के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने विकास के लिए कोई ठोस काम नहीं किया, जबकि वर्तमान सरकार हर क्षेत्र में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल बाधा उत्पन्न करने का काम कर रहा है।
सदन के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन
कार्यवाही स्थगित होने के बाद विपक्षी दलों ने सदन के बाहर नारेबाजी की और गृह मंत्री सम्राट चौधरी से इस्तीफे की मांग की। राबड़ी देवी ने आरोप लगाया कि उनके गृह मंत्री बनने के बाद राज्य में आपराधिक घटनाएं बढ़ी हैं और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
माइक बंद करने का आरोप
राजद एमएलसी सुनील कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि सदन के अंदर मुख्यमंत्री के बोलने के दौरान उनका माइक बंद कर दिया गया था। उन्होंने मांग की कि यह स्पष्ट किया जाए कि किसके निर्देश पर ऐसा हुआ।
दोबारा शुरू हुई कार्यवाही में भी तकरार
दोपहर ढाई बजे के बाद जब सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक बार फिर तीखी बहस देखने को मिली। मंत्री अशोक चौधरी ने विपक्ष के प्रदर्शन पर तंज कसते हुए कहा कि जनता ने उन्हें सीमित समर्थन दिया है। इस पर राबड़ी देवी ने पलटवार करते हुए चुनाव में “वोट चोरी” का आरोप लगाया। जदयू के नीरज कुमार ने भी जवाब देते हुए कहा कि यदि वोट चोरी का आरोप लगाया जा रहा है तो यह सभी पर समान रूप से लागू होगा।
दिन भर चले इस घटनाक्रम के कारण विधान परिषद का माहौल गर्म रहा और बजट सत्र के दौरान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए।


