टी20 वर्ल्ड कप में इटली की पहली एंट्री अपने-आप में ऐतिहासिक है, लेकिन इस टीम में शामिल जसप्रीत सिंह की कहानी इसे और खास बना देती है। पंजाब के फगवाड़ा से निकलकर इटली और फिर इंग्लैंड होते हुए इंटरनेशनल क्रिकेट तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, मेहनत और जुनून का उदाहरण है।
10 साल की उम्र में इटली पहुंचे
जसप्रीत सिंह महज 10 साल की उम्र में अपने माता-पिता के साथ इटली के शहर बर्गमो चले गए थे। इतने साल विदेश में रहने के बावजूद उन्होंने अपनी भाषा और अपने शहर फगवाड़ा से रिश्ता नहीं तोड़ा। इंटरव्यू में हिंदी में बात करने की उनकी इच्छा इसी जुड़ाव को दिखाती है।
शुरुआती संघर्ष
इटली में उनके माता-पिता फैक्ट्री में मजदूरी करते थे। नया देश, नई भाषा और अलग संस्कृति—सब कुछ चुनौती भरा था। जसप्रीत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह थी कि वहां क्रिकेट खेलने की सुविधा लगभग नहीं के बराबर थी। फिर भी उन्होंने बर्गमो क्रिकेट क्लब जॉइन किया और साथ-साथ पिता की मदद के लिए इलेक्ट्रीशियन का कोर्स भी किया।
इंग्लैंड में टैक्सी चलाकर किया गुजारा
बेहतर क्रिकेट सुविधाओं की तलाश में वह इंग्लैंड के बर्मिंघम पहुंचे, जहां टर्फ विकेट पर खेलने का मौका मिला। खर्च चलाने के लिए उन्होंने उबर ड्राइवर के तौर पर काम किया। दिन में काम और खाली समय में क्रिकेट—यही दिनचर्या रही। बर्मिंघम एंड डिस्ट्रिक्ट प्रीमियर लीग में खेलने से उनके खेल में निखार आया।
2019 में इंटरनेशनल डेब्यू
जसप्रीत सिंह एक राइट-आर्म तेज गेंदबाज हैं। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 2019 में नॉर्वे के खिलाफ इटली के लिए इंटरनेशनल डेब्यू किया। इटली 2024 टी20 वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई करने के करीब पहुंचा था, लेकिन आयरलैंड से हार गया। हालांकि जून 2025 में यूरोपियन रीजनल क्वालिफायर जीतकर टीम ने आखिरकार वर्ल्ड कप का टिकट हासिल कर लिया।
“सिर्फ खेलने नहीं, मुकाबला करने आए हैं”
जसप्रीत का कहना है कि टीम सिर्फ भाग लेने नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धा करने आई है। उनके लिए भारत आकर खेलना भावनात्मक भी है, क्योंकि बचपन से जिन स्टेडियमों—ईडन गार्डन्स, वानखेड़े, चेपॉक—को टीवी पर देखा, अब उन्हीं मैदानों पर खेलने का मौका मिला है।
अनुभव से उम्मीद
वह मानते हैं कि भारत में खेलने से टीम को पिच, कंडीशन और स्टेडियम के आयाम समझने का मौका मिल रहा है, जिसका फायदा आगे मिलेगा। उनका मानना है कि इटली में खिलाड़ियों में टैलेंट की कमी नहीं, बस इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्ट्रक्चर बेहतर होने की जरूरत है, और वर्ल्ड कप के बाद हालात सुधरने की उम्मीद है।
जसप्रीत सिंह की कहानी यह दिखाती है कि सीमित संसाधनों और मुश्किल हालात के बावजूद अगर जुनून और धैर्य हो, तो अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा जा सकता है। इटली की टीम के लिए यह सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि भविष्य की नई शुरुआत भी है।


