भागलपुर | भागलपुर संग्रहालय में एक नई और अच्छी पहल शुरू हुई है। 1976 में स्थापित इस म्यूजियम में अब ‘पुस्तकालय’ (Library) को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। अब तक यहां फर्स्ट फ्लोर के एक छोटे से कमरे में किताबें बेतरतीब पड़ी थीं, जिन्हें अब व्यवस्थित कर अगले हफ्ते से आम लोगों के लिए खोला जाएगा।
1976 से जमा हो रही थीं किताबें, अब मिलीं संवारने वालीं उंगलियां
म्यूजियम की स्थापना के समय से ही कई विद्वानों और अधिकारियों ने यहां किताबें भेंट की थीं। लेकिन रख-रखाव की कमी से इनका कोई इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था।
- नई पहल: जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सह सहायक संग्रहालयाध्यक्ष अंकित रंजन के निर्देश पर अब इन किताबों का डॉक्युमेंटेशन किया जा रहा है।
- वॉलिंटियर्स: इस काम में तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के शोधार्थी (Researchers) मदद कर रहे हैं। इनमें आयशा, फैसल, रोजी, आनंद और रितेश शामिल हैं, जो ‘वॉलेनटीयरिंग प्रोग्राम’ के तहत लाइब्रेरी को हाईटेक लुक दे रहे हैं।
इतिहास से लेकर गांधी तक… सब मिलेगा यहां
अगले सप्ताह से शुरू होने वाली इस लाइब्रेरी में छात्रों और शोधार्थियों को पढ़ने की पूरी सुविधा मिलेगी। यहां इन विषयों का खजाना है:
- कला और संस्कृति
- इतिहास और पुरातत्व
- भाषा और साहित्य
- दर्शनशास्त्र और गांधी विचार
अपील: “अंग का इतिहास घर में न रखें, हमें दें”
अंकित रंजन ने शहर के बुद्धिजीवियों से एक खास अपील की है।
- दान करें: अगर आपके पास भागलपुर या अंग प्रदेश के इतिहास, कला और संस्कृति से जुड़ी कोई दुर्लभ किताब है, तो उसे म्यूजियम को दान करें। ताकि आने वाली पीढ़ी उसे पढ़ सके।
- मकसद: उनका कहना है कि जल्द ही यह म्यूजियम अंग प्रदेश की संस्कृति को समझने वालों के लिए एक बड़ा अध्ययन केंद्र बनकर उभरेगा।


