
भागलपुर | बिहार सरकार के उर्दू निदेशालय और जिला प्रशासन की ओर से शनिवार (7 फरवरी 2026) को टाउन हॉल में “फ़रोग-ए-उर्दू सेमिनार, कार्यशाला एवं मुशायरा” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के शिक्षाविद्, शायर और छात्रों की भारी भीड़ उमड़ी।
1. DM का विजन: “उर्दू को रोजगार से जोड़ेंगे”
जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने अपने संबोधन में उर्दू के विकास के लिए प्रशासन का रोडमैप रखा:
- पहचान: “उर्दू गंगा-जमुनी तहज़ीब की पहचान है, जो समाज में भाईचारा बढ़ाती है।”
- शिक्षा: स्कूलों और कॉलेजों में उर्दू पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारी जाएगी। उर्दू शिक्षकों की कमी दूर की जाएगी और उन्हें बेहतर ट्रेनिंग दी जाएगी।
- अहम फैसला: प्रशासन की कोशिश रहेगी कि सरकारी योजनाओं की जानकारी उर्दू भाषा में भी आम लोगों तक पहुंचे, ताकि किसी को भाषा की वजह से दिक्कत न हो।
2. पटना से आए मेहमान की नसीहत: “टेक्नोलॉजी भी सीखें”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और बिहार सरकार के उर्दू निदेशालय के निदेशक एस.एम. परवेज आलम ने छात्रों को एक अहम सलाह दी।
- उन्होंने कहा कि सिर्फ जुबान सीखना काफी नहीं है।
- छात्रों को उर्दू के साथ-साथ आधुनिक तकनीक (Modern Technology) और प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) की भी तैयारी करनी चाहिए, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभा सकें।
3. महफिल में गूंजी तालियां
सेमिनार के बाद मुशायरे का दौर चला, जिसमें स्थानीय और आमंत्रित शायरों ने अपने कलाम पेश किए।
- जिला उर्दू भाषा कोषांग की प्रभारी सुभाषिनी प्रसाद ने बताया कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने में मदद मिलती है और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम होते रहेंगे।
- कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने डिजिटल युग में उर्दू की संभावनाओं, पत्रकारिता और अनुवाद पर भी अपने विचार रखे।


