भागलपुर | जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा प्लान तैयार किया है। 10 फरवरी से शुरू हो रहे सामूहिक दवा सेवन (MDA) कार्यक्रम के तहत जिले के 34 लाख 81 हजार लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई जाएगी। सिविल सर्जन डॉ. अशोक प्रसाद ने मीडिया कार्यशाला में बताया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है।
1. 11 फरवरी को ‘मेगा कैंप’, घर-घर पहुंचेंगे कर्मी
- शुरुआत: 10 फरवरी से अभियान शुरू होगा।
- मेगा डे: 11 फरवरी को ‘एमडीए मेगा कैंप’ लगेगा, जिसका राज्य स्तरीय उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री करेंगे। बूथ लगाकर दवा खिलाई जाएगी।
- डोर-टू-डोर: जो लोग बूथ पर नहीं आ पाएंगे, उनके लिए स्वास्थ्यकर्मी अगले 14 दिनों तक घर-घर जाकर दवा खिलाएंगे।
2. चक्कर आए तो डरें नहीं, खुश हो जाएं
सिविल सर्जन ने एक बहुत महत्वपूर्ण बात बताई है।
- साइड इफेक्ट: अगर दवा खाने के बाद किसी को मितली (उल्टी जैसा) या चक्कर आए, तो घबराने की जरूरत नहीं है।
- शुभ संकेत: यह एक ‘शुभ संकेत’ है। इसका मतलब है कि आपके शरीर में फाइलेरिया के परजीवी (Parasites) मौजूद थे और दवा अपना काम कर रही है—वे मर रहे हैं।
- सुरक्षा: किसी भी आपात स्थिति के लिए हर ब्लॉक में रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात रहेगी।
3. ‘हाथीपांव’ कैसे फैलता है?
वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरती कुमारी ने बताया कि यह बीमारी संक्रमित मच्छर के काटने से फैलती है। इसे लिम्फैटिक फाइलेरिया भी कहते हैं।
- लक्षण: इसमें हाथ-पैर या अन्य अंगों में असामान्य सूजन (हाथीपांव) और हाइड्रोसील जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- बचाव: अगर कोई व्यक्ति लगातार 5 साल तक साल में एक बार यह दवा खा ले, तो उसे जीवन भर फाइलेरिया होने का खतरा नहीं रहता।
4. नियम: किसे खानी है, किसे नहीं?
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ ने दवा खाने के नियम स्पष्ट किए:
- किन्हें नहीं खानी: 2 साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति।
- किन्हें खानी है: बीपी (Blood Pressure), शुगर और गठिया के मरीज बेझिझक यह दवा खा सकते हैं।
- शर्त: दवा कभी भी खाली पेट नहीं खानी है।
- निर्देश: दवा का वितरण नहीं होगा, यानी स्वास्थ्यकर्मी आपके हाथ में दवा नहीं देंगे, बल्कि अपने सामने ही खिलाएंगे।


