पटना | लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला आज (शनिवार) बिहार विधान सभा के स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने नेताओं को आईना दिखाते हुए कहा कि “सदन लोकतंत्र का मंदिर है”, यहां शोर-शराबा नहीं, संवाद होना चाहिए।
1. नसीहत: “वेल में आने से घट रही है मर्यादा”
ओम बिरला ने सदन में गिरते स्तर पर गहरी चिंता जताई।
- चेतावनी: उन्होंने कहा- “आज हम देख रहे हैं कि किस प्रकार सभागृहों की मर्यादा घट रही है। नारेबाजी, व्यवधान और वेल (Well) में आने जैसी प्रवृत्तियों से बचें।”
- सलाह: अपनी बात तर्क और संवाद से रखें, न कि शोर से। जिस विधानसभा के सदस्य संविधान को जानेंगे और सार्थक चर्चा करेंगे, वही विधानसभा सशक्त होगी।
2. विधायक की ‘असली पावर’ क्या है?
बिरला ने विधायकों को समझाया कि एक सशक्त विधायक कौन होता है।
- परिभाषा: विधायक की वास्तविक शक्ति नैतिक मूल्यों, जिम्मेदारी और संवैधानिक प्रक्रियाओं के ज्ञान से आती है।
- ट्रेनिंग: उन्होंने कहा कि बदलते वक्त में नए और पुराने दोनों विधायकों के लिए ट्रेनिंग जरूरी है। इसके लिए PRIDE संस्थान एक सशक्त मंच है।
3. डिजिटल बिहार की तारीफ: NeVA से आएगी पारदर्शिता
अपने भाषण में लोकसभा अध्यक्ष ने बिहार विधान सभा के डिजिटल होने (NeVA प्लेटफॉर्म) की तारीफ की।
- उन्होंने कहा कि इससे कार्यवाही पारदर्शी होगी और विधायकों को बहस के दौरान मजबूत डेटा और तथ्य रखने में मदद मिलेगी।
4. “बिहार लोकतंत्र की जननी है”
अंत में उन्होंने बिहार की तारीफ करते हुए कहा कि यह धरती लोकतांत्रिक परंपराओं की जन्मस्थली रही है। यहां की विरासत ने ही देश की संसदीय व्यवस्था को वैचारिक आधार दिया है। उन्होंने विधायकों से अपील की कि वे किसानों, महिलाओं और युवाओं की आवाज को प्राथमिकता से सदन में उठाएं।


