
पटना | बिहार सरकार ने ‘सात निश्चय-3’ (कृषि में प्रगति-प्रदेश में समृद्धि) के तहत डेयरी उद्योग को लेकर बड़ा रोडमैप तैयार कर लिया है। अब पशुपालकों को दूध बेचने के लिए शहर नहीं जाना पड़ेगा और न ही बिचौलियों के चक्कर काटने होंगे। सरकार ने फैसला लिया है कि राज्य की सभी 8053 पंचायतों में सुधा डेयरी के काउंटर खोले जाएंगे और हर गांव में दुग्ध समिति बनेगी।
1. मिशन ‘विलेज’: 2 साल में हर गांव जुड़ेगा
पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि अगले दो वर्षों के अंदर हर गांव में समिति का गठन कर लिया जाए।
- आंकड़ा: राज्य में कुल 39,073 गांव हैं।
- स्टेटस: अब तक 25,593 गांवों में दुग्ध उत्पादन समितियां बन चुकी हैं।
- टारगेट: बाकी बचे गांवों में समितियां बनते ही पशुपालकों को उनके दूध का उचित मूल्य दरवाजे पर ही मिल जाएगा।
2. मिशन ‘पंचायत’: 7953 नई दुकानें खुलेंगी
सात निश्चय-2 में हर प्रखंड (Block) तक सुधा काउंटर पहुंच चुका था। अब बारी पंचायतों की है।
- समय सीमा: वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंत तक सभी पंचायतों में सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र (Sudha Milk Parlour) खोल दिए जाएंगे।
- अभी क्या है हाल: कुल 8053 पंचायतों में से अभी सिर्फ 100 में ये केंद्र हैं। शेष 7953 पंचायतों में काम युद्धस्तर पर शुरू होगा।
3. ‘जीविका दीदियों’ की बल्ले-बल्ले
इन हजारों नई दुकानों का मालिक कौन होगा? सरकार ने इसके लिए महिलाओं को चुना है।
- प्राथमिकता: नए खुलने वाले सुधा बिक्री केंद्र ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत सबसे पहले जीविका दीदियों को आवंटित किए जाएंगे।
- फायदा: इससे गांव की महिलाएं उद्यमी बनेंगी और घर बैठे रोजगार मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बूम आएगा और लोगों की जेब में सीधा पैसा पहुंचेगा।


