भागलपुर में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल: 250 साल से हिंदू परिवार चढ़ा रहा पहली चादर; मंगन शाह के उर्स में उमड़ा आस्था का सैलाब

भागलपुर (बिहपुर/नवगछिया) | नफरतों के दौर में भागलपुर का मिल्की गांव मोहब्बत का पैगाम दे रहा है। यहां हज़रत सैयदना दाता मंगन शाह की दरगाह पर उर्स मेला शुरू हो चुका है। यह स्थल सिर्फ इबादत की जगह नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता का एक ऐसा संगम है, जो पिछले ढाई सौ सालों से अटूट है।

कायस्थ परिवार ने चढ़ाई पहली चादर, तब शुरू हुआ उर्स

​इस उर्स की सबसे खास और चौंकाने वाली बात इसकी शुरुआत है।

  • परंपरा: उर्स की पहली चादर चढ़ाने का हक बिहपुर के एक हिंदू कायस्थ परिवार के पास है।
  • समय: 5 फरवरी की रात 12 बजकर 5 मिनट पर इसी परिवार ने चादरपोशी की रस्म अदा की और इसी के साथ उर्स की शुरुआत हुई।
  • इतिहास: स्थानीय कमिटी के मुताबिक, यह परंपरा 250 साल से भी पुरानी है और आज तक बिना रुके निभाई जा रही है।

लाखों की भीड़, 12 फरवरी तक रहेगी रौनक

​दाता मंगन शाह की ख्याति दूर-दूर तक फैली है।

  • श्रद्धालु: यहां भागलपुर और आसपास के जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी लाखों की संख्या में जायरीन (श्रद्धालु) पहुंच रहे हैं।
  • अवधि: यह उर्स मेला 12 फरवरी 2026 तक चलेगा।
  • मान्यता: कहा जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई दुआ और मन्नत जरूर पूरी होती है। लोग यहां मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा लेने आते हैं।

मेले में सजी दुकानें, रोजी-रोटी का जरिया

​उर्स के साथ-साथ यहां एक भव्य मेला भी लगा है, जो लोक संस्कृति की झलक पेश कर रहा है।

  • ​मेले में स्थानीय हस्तशिल्प, खिलौने और खान-पान की दुकानें सजी हैं।
  • ​इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिल रहा है।

​वर्तमान समय में जब समाज में दूरियां बढ़ रही हैं, मंगन शाह का यह उर्स भाईचारे और ‘अनेकता में एकता’ का एक शानदार सबक है।

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