भागलपुर/नई दिल्ली | भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने आज लोकसभा में गंगा कटाव और ड्रेजिंग को लेकर एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा उठाया। उन्होंने प्रश्न संख्या 1348 के जरिए केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर खींचा कि कैसे गंगा में हो रही ड्रेजिंग नाथनगर और आसपास के गांवों के लिए ‘काल’ बन सकती है।
सांसद की चिंता: दक्षिणी तट पर ड्रेजिंग यानी तबाही
सांसद ने सदन में स्पष्ट किया कि गंगा में ड्रेजिंग का मामला केवल जहाजों के चलने तक सीमित नहीं है।
- खतरा: अगर गंगा के दक्षिणी तट (Southern Bank) की तरफ बिना सोचे-समझे या असंतुलित तरीके से ड्रेजिंग की गई, तो इसका सीधा असर भागलपुर के तटीय गांवों पर पड़ेगा।
- असर: इससे नाथनगर प्रखंड समेत कई इलाकों में भीषण कटाव (Erosion), भूमि क्षरण और बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा। हजारों एकड़ कृषि भूमि नदी में समा सकती है।
केंद्र सरकार का जवाब: ‘जहाज चलाने के लिए गहराई जरूरी’

सांसद के सवाल के जवाब में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री ने बताया:
- गंगा नदी राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (National Waterway-1) है।
- मालवाहक जहाजों की सुगम आवाजाही के लिए नदी में न्यूनतम गहराई (Depth) बनाए रखना जरूरी है।
- भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) जरूरत के आधार पर ड्रेजिंग का काम कर रहा है।
सांसद अजय मंडल की 3 बड़ी मांगें
मंत्री के जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद ने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जन-सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने सरकार के सामने 3 शर्तें रखीं:
- वैज्ञानिक स्टडी हो: ड्रेजिंग शुरू करने से पहले उस इलाके की भौगोलिक स्थिति का वैज्ञानिक अध्ययन और स्थानीय प्रशासन की भागीदारी अनिवार्य हो।
- गांवर पर असर का आकलन: ड्रेजिंग से तटीय गांवों पर क्या असर पड़ेगा, इसका ‘पूर्व आकलन’ (Pre-assessment) किया जाए।
- कड़ी निगरानी: ड्रेजिंग किस दिशा में और कितनी तीव्रता से हो रही है, इसकी विशेष निगरानी हो।
MP का अल्टीमेटम: अजय मंडल ने साफ किया कि वे इस विषय पर लगातार नजर बनाए रखेंगे और भागलपुर की जनता के हितों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक आवाज उठाते रहेंगे।


