पटना हाईकोर्ट से मंत्री संतोष सुमन को बड़ी राहत, आपराधिक मामले में संज्ञान आदेश रद्द

पटना: पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री संतोष सुमन (मांझी) को बड़ी कानूनी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले में निचली अदालत द्वारा संज्ञान लेने के आदेश को रद्द कर दिया है। मंत्री पर एक पुलिस अधिकारी से मारपीट और एक महिला से छेड़छाड़ समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए थे।

निचली अदालत के आदेश को दी थी चुनौती

संतोष मांझी ने वर्ष 2021 में गया के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा पारित उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में संज्ञान लिया गया था। उन पर दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, सरकारी आदेश की अवहेलना, रास्ता रोकना, मारपीट, गंभीर चोट, महिला से दुर्व्यवहार, अपहरण, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित आईपीसी, बिहार पुलिस एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई थीं।

राजनीतिक द्वेष में फंसाने का आरोप

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकीलों ने दलील दी कि मंत्री को राजनीतिक द्वेष के कारण झूठे मामले में फंसाया गया है। उनका कहना था कि घटना के समय संतोष मांझी केवल सभा को संबोधित कर रहे थे और उनके खिलाफ हिंसा या किसी अपराध में प्रत्यक्ष संलिप्तता का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। यह भी तर्क दिया गया कि संज्ञान लेने का आदेश बिना पर्याप्त साक्ष्यों के पारित किया गया था।

राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया, लेकिन यह स्वीकार किया गया कि मंत्री के खिलाफ मुख्य आरोप सिर्फ सभा को संबोधित करने से जुड़ा है।

हाईकोर्ट ने माना—आरोप प्रमाणित नहीं

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस संदीप कुमार ने कहा कि एफआईआर और उपलब्ध तथ्यों से यह स्पष्ट नहीं होता कि संतोष मांझी ने किसी पर हमला किया या हिंसा में शामिल थे। केवल सभा को संबोधित करना अभियोजन पक्ष के गंभीर आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने 12 फरवरी 2021 को गया के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा पारित संज्ञान आदेश को रद्द कर दिया।

क्या था पूरा मामला?

एफआईआर के अनुसार बोधगया थाना प्रभारी को डोमुहाने चौक पर सड़क जाम की सूचना मिली थी। पुलिस के पहुंचने पर कुछ लोग टायर जलाकर प्रदर्शन कर रहे थे और लाठी-डंडे के साथ हंगामा कर रहे थे। आरोप था कि संतोष मांझी लाउडस्पीकर से सभा को संबोधित कर रहे थे और 2017 के एक पुराने मामले में गिरफ्तारी नहीं होने के विरोध में प्रदर्शन हो रहा था।

यह भी आरोप लगाया गया कि भीड़ ने एक बुर्का पहने महिला के साथ दुर्व्यवहार किया, थाना प्रभारी से मारपीट की और एक टेंपो को क्षतिग्रस्त किया। इसके बाद संतोष मांझी समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

अन्य आरोपियों पर जारी रहेगी कार्रवाई

हाईकोर्ट के इस फैसले से मंत्री संतोष मांझी को बड़ी राहत मिली है, लेकिन मामले के अन्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।


 

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