भागलपुर (पीरपैंती) | एक तरफ डिजिटल इंडिया और स्मार्ट क्लास की बातें होती हैं, तो दूसरी तरफ पीरपैंती प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय छोटी दिलौरी की हकीकत शर्मसार करने वाली है। स्थापना के 30 साल बाद भी यह स्कूल एक अदद सड़क को तरस रहा है। हरिनकोल पंचायत के इस स्कूल में नन्हे बच्चे हर दिन जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करने आते हैं।
1. सफर या सजा? कीचड़ भरी पगडंडी से गुजरता है रास्ता
स्कूल जाने का रास्ता किसी चुनौती से कम नहीं है।
- बरसात में आफत: बारिश हो या बाढ़, रास्ता कीचड़ से भर जाता है।
- रोज का खतरा: छोटे-छोटे बच्चे अक्सर फिसलकर गिरते हैं, उनके कपड़े खराब होते हैं और चोटें लगती हैं।
- मजबूरी: शिक्षक और अभिभावक भी इसी खेत की पगडंडी से होकर आने को मजबूर हैं।
2. दीवार टूटी, शौचालय गंदे… स्कूल बना नशेड़ियों का अड्डा
स्कूल की चारदीवारी (Boundary Wall) पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है:
- असामाजिक तत्वों का डेरा: रात के अंधेरे में यहां असामाजिक तत्व घुस जाते हैं। वे स्कूल परिसर में गंदगी फैलाते हैं और गुटखा खाकर थूकते हैं।
- शौचालय में तोड़फोड़: शरारती तत्वों ने शौचालय भी तोड़ दिए हैं। मजबूरी में बच्चों को शौच के लिए स्कूल से बाहर जाना पड़ता है, जो उनकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
3. ‘जहर’ पीने को मजबूर बच्चे
दुश्वारियां यहीं खत्म नहीं होतीं। स्कूल में लगा सरकारी चापाकल आयरन युक्त (दूषित) पानी उगल रहा है। कोई विकल्प न होने के कारण बच्चे यही पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे उनके बीमार पड़ने का खतरा बना हुआ है।
4. उम्मीद की किरण: एक शिक्षिका ने बदल दी तस्वीर
तमाम अभावों के बावजूद, स्कूल में पढ़ाई का जज्बा कायम है। ग्रामीण नीरो देवी, पंकज यादव और धर्मेश यादव बताते हैं कि एक साल पहले हालात बहुत खराब थे।
- लेकिन जब से शिक्षिका श्रेया चौधरी ने कमान संभाली है, स्कूल में रौनक लौट आई है।
- कम संसाधनों में भी उन्होंने बच्चों की उपस्थिति बढ़ाई है और पढ़ाई का स्तर सुधारा है।
गुहार: अब तो सुन लो सरकार!
शिक्षक सुनील कुमार यादव, बरुण पासवान और शिक्षिका श्रेया चौधरी के साथ-साथ पूरे गांव ने प्रशासन से गुहार लगाई है। उनकी मांगें साफ हैं:
- स्कूल तक पक्की सड़क बने।
- मजबूत चारदीवारी का निर्माण हो।
- शुद्ध पेयजल और सुरक्षित शौचालय की व्यवस्था हो।


