पटना | बिहार में शिक्षकों के स्थानांतरण (Transfer) का मामला सुलझने के बजाय एक नई मुसीबत बन गया है। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों से पोस्टिंग के लिए तीन विकल्प (Option) मांगे थे, लेकिन हकीकत यह है कि न पहला विकल्प मिला, न दूसरा और न ही तीसरा। शिक्षकों को किसी चौथी ही जगह भेज दिया गया।
गुरुवार को यह मामला बिहार विधान परिषद में जोरदार तरीके से उठा। भाजपा विधान पार्षद (MLC) संजय मयूख ने सदन में सूचना के अधिकार के तहत खड़े होकर शिक्षा विभाग की इस मनमानी पर गंभीर सवाल उठाए।
सवाल: जब मनमानी ही करनी थी, तो 3 विकल्प क्यों मांगे?
संजय मयूख ने सदन में सरकार को घेरते हुए कहा कि ट्रांसफर पॉलिसी पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा:
“एक शिक्षक ने अपने विकल्प के तौर पर गोपालगंज मांगा था, लेकिन विभाग ने उसे उठाकर कटिहार भेज दिया। अगर आपको अपनी मर्जी से ही पोस्टिंग करनी थी, तो शिक्षकों से तीन-तीन विकल्प भरने का नाटक क्यों करवाया गया?”
कैंसर मरीज को गांव भेजा, महिला टीचर्स परेशान
भाजपा एमएलसी ने मानवीय आधार पर भी सरकार की क्लास लगाई। उन्होंने सदन का ध्यान गंभीर रूप से बीमार और महिला शिक्षकों की ओर खींचा:
- कैंसर पीड़ितों की अनदेखी: कई शिक्षक कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उन्हें जिला मुख्यालय (District HQ) में पोस्टिंग मिलनी चाहिए थी ताकि इलाज हो सके, लेकिन उन्हें सुदूर गांवों में भेज दिया गया है।
- महिला शिक्षकों की आफत: बिहार में बड़ी संख्या में महिलाएं शिक्षक बनी हैं। उन्हें उनके परिवार से दूर भेजकर परेशान किया जा रहा है।
सरकार सहानुभूति पूर्वक विचार करे
संजय मयूख ने मांग की है कि सरकार इस मुद्दे पर सहानुभूति पूर्वक विचार करे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर “ऑप्शन” मांगा गया है, तो पोस्टिंग उसी आधार पर होनी चाहिए। नियमों की अनदेखी कर शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना बंद होना चाहिए।
इनसाइड स्टोरी:
बताया जा रहा है कि सॉफ्टवेयर और रैंडमाइजेशन के नाम पर हुई इस पोस्टिंग से हजारों शिक्षक नाराज हैं। कई शिक्षक तो अब नौकरी छोड़ने या कोर्ट जाने का मन बना रहे हैं।


