लोकसभा में बवाल, हंगामे के कारण दिनभर ठप रही कार्यवाही, पीएम का भाषण टला

नई दिल्ली: लोकसभा में बुधवार को जोरदार हंगामे के चलते पूरा दिन कार्यवाही बाधित रही। विपक्षी सदस्यों के तीखे विरोध और नारेबाजी के कारण राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री का जवाब नहीं हो सका। हालात इतने बिगड़ गए कि पीठासीन अधिकारी को सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी। दिनभर तीन बार स्थगन के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी।

सुबह से ही टकराव के संकेत
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया। नारेबाजी और सीटों के सामने आकर प्रदर्शन के कारण कामकाज आगे नहीं बढ़ पाया। बार-बार व्यवस्था बहाल करने की अपील की गई, लेकिन शोरगुल जारी रहा। इस वजह से कार्यवाही को पहले कुछ समय के लिए और फिर दोबारा स्थगित करना पड़ा।

शाम को बढ़ा तनाव, वेल पार कर आगे पहुंचे सांसद
शाम करीब पांच बजे जब सदन फिर से शुरू हुआ तो माहौल और गरम हो गया। पीठासीन अधिकारी ने जैसे ही अगले वक्ता का नाम पुकारा, विपक्षी सांसद वेल में पहुंच गए। विरोध कर रहीं महिला सांसद आगे बढ़ते हुए प्रधानमंत्री और मंत्रियों की सीटों के पास तक जा पहुंचीं। यह दृश्य देख सदन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

टकराव टालने के लिए सत्ता पक्ष पीछे हटा
स्थिति बिगड़ती देख सत्ता पक्ष के कई सांसद पीछे हट गए ताकि किसी तरह की धक्का-मुक्की या टकराव की नौबत न आए। शोरगुल के बीच पीठासीन अधिकारी ने तुरंत कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करने का फैसला सुनाया।

पीएम का जवाब टला, अब अगली बैठक में संभावना
दिन का सबसे अहम एजेंडा राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री का जवाब था, जो हंगामे की भेंट चढ़ गया। अब संभावना है कि अगली कार्यवाही में प्रधानमंत्री सदन को संबोधित करेंगे, यदि माहौल सामान्य रहा।

दुर्लभ संसदीय स्थिति
संसदीय जानकारों के मुताबिक, ऐसे मौके बहुत कम आते हैं जब विरोध कर रहे सदस्य वेल पार कर मंत्रियों की सीटों तक पहुंच जाते हैं। इसे संसदीय परंपरा के लिहाज से असाधारण स्थिति माना जा रहा है। हंगामे के बाद भी कुछ विपक्षी सदस्य सदन के भीतर नारेबाजी करते रहे।

अब आगे क्या
सरकार की ओर से संकेत है कि वह चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन व्यवस्थित कार्यवाही जरूरी है। वहीं विपक्ष अपने मुद्दों पर बहस की मांग पर अड़ा हुआ है। अगला सत्र टकराव या समाधान—दोनों में से किस दिशा में जाएगा, इस पर सबकी नजर टिकी है।

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