
पटना। बिहार में उच्च शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि राज्य के 55 पुराने और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही जिन 213 प्रखंडों में अभी तक कोई डिग्री कॉलेज नहीं है, वहां जुलाई 2026 से पढ़ाई शुरू कराने का लक्ष्य तय किया गया है।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह पहल “सात निश्चय–3” कार्यक्रम के चौथे संकल्प “उन्नत शिक्षा–उज्ज्वल भविष्य” के तहत लागू की जा रही है।
पुराने प्रतिष्ठित संस्थानों का होगा उन्नयन
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के चुनिंदा 55 प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर विकसित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम शुरू कर दिया गया है। इन संस्थानों में आधारभूत संरचना, शैक्षणिक गुणवत्ता, रिसर्च सुविधाएं और रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों पर विशेष जोर दिया जाएगा।
उन्होंने निर्देश दिया है कि उन्नयन की प्रक्रिया में संस्थानों के अनुभवी शिक्षकों, पूर्व छात्रों और वर्तमान विद्यार्थियों से भी सुझाव लिए जाएं, ताकि विकास योजना व्यवहारिक और प्रभावी बन सके।
हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज खोलने का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य राज्य के सभी 534 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज उपलब्ध कराना है। फिलहाल 213 प्रखंड ऐसे हैं जहां कोई भी अंगीभूत या संबद्ध डिग्री कॉलेज नहीं है। इन सभी प्रखंडों में पहले चरण में कॉलेज खोलने और जुलाई 2026 से शैक्षणिक सत्र शुरू कराने का निर्देश दिया गया है।
लड़कियों को उच्च शिक्षा में मिलेगा बड़ा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज खुलने से खासकर छात्राओं को उच्च शिक्षा हासिल करने में बड़ी सुविधा मिलेगी। दूर शहर जाने की बाध्यता कम होगी और ड्रॉपआउट दर में भी कमी आने की उम्मीद है।
शिक्षा बजट में भी सबसे ज्यादा आवंटन
राज्य सरकार ने हालिया बजट में भी शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग को सबसे ज्यादा राशि आवंटित की है। सरकार का दावा है कि उच्च शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता सुधार के जरिए युवाओं को रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।
सरकार के इस फैसले को राज्य में उच्च शिक्षा के विकेंद्रीकरण और पहुंच बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।


