बिहार में सिंगल यूज प्लास्टिक से बनी 10.5 किमी लंबी सड़कें, तीन जिलों में सफल प्रयोग
पटना।घर-घर से निकलने वाला सिंगल यूज प्लास्टिक अब सिर्फ कचरा नहीं, बल्कि गांवों की मजबूत सड़कों का आधार बन रहा है। लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत डोर-टू-डोर कचरा संग्रह के बाद प्लास्टिक अपशिष्ट के प्रसंस्करण से राज्य में ग्रामीण सड़कों के निर्माण की नई पहल शुरू हुई है।
ग्रामीण विकास विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग के संयुक्त प्रयास से अब तक पूर्णिया, खगड़िया और औरंगाबाद में प्लास्टिक कचरे से करीब 10.5 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जा चुकी हैं। इस प्रयोग में लगभग 8 मीट्रिक टन प्लास्टिक वेस्ट का उपयोग किया गया है।
ऐसे बनती है प्लास्टिक वाली सड़क
लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत ग्रामीण इलाकों से एकत्र किए गए प्लास्टिक कचरे को राज्य की 171 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों में भेजा जाता है। यहां प्लास्टिक की कतरन कर उसे ग्रामीण कार्य विभाग को सौंपा जाता है।
इस प्लास्टिक को गर्म डामर में 7 प्रतिशत अनुपात में मिलाकर सड़क बनाई जाती है। इससे सड़क ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बनती है।
किन जिलों में बनी सड़कें
| जिला | सड़क की लंबाई | उपयोग हुआ प्लास्टिक |
|---|---|---|
| खगड़िया | 1 किमी | 1 मीट्रिक टन |
| पूर्णिया | 4.05 किमी | 3.08 मीट्रिक टन |
| औरंगाबाद | 5 किमी | 3.5 मीट्रिक टन |
जलजमाव से भी नहीं टूटती ये सड़कें
राज्य सलाहकार रतनीश वर्मा के अनुसार, प्लास्टिक से बनी सड़कों पर पानी का असर नहीं होता। यही वजह है कि इनकी उम्र पारंपरिक सड़कों से कई गुना ज्यादा होती है। इससे मरम्मत का खर्च भी कम होगा और सड़कें लंबे समय तक टिकेंगी।
अन्य जिलों में भी होगा विस्तार
ग्रामीण विकास विभाग ने संकेत दिया है कि इस मॉडल को जल्द ही राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। इससे एक ओर जहां प्लास्टिक प्रदूषण घटेगा, वहीं ग्रामीण इलाकों में बेहतर सड़क नेटवर्क भी तैयार होगा।
“प्लास्टिक कचरे का उपयोग ग्रामीण सड़कों में करना पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में बड़ा कदम है। जलजमाव वाले क्षेत्रों में ये सड़कें ज्यादा मजबूत साबित होंगी। इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।”
— श्रवण कुमार, ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री


