भागलपुर।कहते हैं कि किस्मत इंसान से बहुत कुछ छीन सकती है, लेकिन अगर प्यार सच्चा हो तो वह भी हार मान लेती है। भागलपुर के सुरखीकल मोहल्ले में ऐसा ही एक दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। सड़क हादसे में एक पैर गंवाने वाले पंकज और गोलाघाट की आरती ने समाज की परवाह किए बिना शिव मंदिर में शादी कर अपने प्यार को अमर बना दिया।
बचपन का प्यार, जिंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा
पंकज और आरती की दोस्ती बचपन में ही प्यार में बदल गई थी। दोनों ने साथ जीने-मरने की कसमें खाई थीं। लेकिन अचानक एक सड़क दुर्घटना ने पंकज की जिंदगी पलट दी। हादसे में उनका एक पैर कट गया।
इलाके में चर्चा शुरू हो गई—
“अब रिश्ता टूट जाएगा, अब आरती साथ नहीं निभाएगी।”
लेकिन यह सिर्फ लोगों का भ्रम था।
जब सबने साथ छोड़ा, तब आरती बनी सबसे मजबूत सहारा
पंकज के मुश्किल वक्त में जब कई लोग पीछे हट गए, तब आरती चट्टान बनकर उसके साथ खड़ी रही। समाज की बातें, रिश्तेदारों की आशंकाएं—कुछ भी उसके फैसले को नहीं डिगा सका।
उसने साफ कह दिया—
“अगर प्यार सच्चा है तो हादसा कुछ नहीं बदल सकता।”
शिव मंदिर में सात फेरे, आंखों में आंसू और दिल में दुआएं
सुरखीकल के शिव मंदिर में दोनों ने सादगी से सात फेरे लिए। न कोई तामझाम, न शोर-शराबा—बस दो दिल और उनकी अटूट मोहब्बत।
मंदिर में मौजूद लोग पहले हैरान हुए, फिर भावुक हो गए।
किसी की आंखें भर आईं तो कोई बोला—
“आज के ज़माने में भी ऐसा प्यार होता है।”
सिर्फ शादी नहीं, सोच पर जीत
यह शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि उस सोच की हार है जो कहती है कि हादसे के बाद इंसान बोझ बन जाता है।
पंकज और आरती ने दिखा दिया कि अगर साथ निभाने का जज़्बा हो, तो टूटा पैर भी नई ज़िंदगी की राह रोक नहीं सकता।
यह कहानी एक संदेश है—
“प्यार हालात का मोहताज नहीं होता।”


