टीएमबीयू में ‘ग्रिवांस कमेटी’ को लेकर विवाद- सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद आदेश जारी करना दुर्भाग्यपूर्ण: ABVP

छात्रों में भ्रम, आंदोलन की चेतावनी

भागलपुर।तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) प्रशासन द्वारा Students Grievance Redressal Committee के गठन को लेकर जारी हालिया आदेश पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कड़ा ऐतराज जताया है। परिषद का कहना है कि जिस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय पहले ही रोक लगा चुका है, उसी से जुड़ा आदेश विश्वविद्यालय द्वारा जारी करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि न्यायालय की मंशा के भी विपरीत है।

ABVP के अनुसार, इस फैसले से छात्रों, शिक्षकों और कॉलेज प्रशासन के बीच भ्रम और असमंजस की स्थिति बन गई है। परिषद ने इसे असमय, अव्यवहारिक और गैर-जिम्मेदाराना कदम करार दिया है।


“न्यायालय के आदेशों की अनदेखी”

ABVP नेताओं ने कहा कि जब कोई मामला न्यायालय में विचाराधीन हो, तब विश्वविद्यालय द्वारा कोई भी प्रशासनिक आदेश जारी करना संवैधानिक मर्यादा के खिलाफ है। इससे न केवल शैक्षणिक माहौल प्रभावित होता है, बल्कि विश्वविद्यालय की साख पर भी सवाल खड़े होते हैं।

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परिषद की प्रमुख मांगें

ABVP ने विश्वविद्यालय प्रशासन से तीन स्पष्ट मांगें रखी हैं—

  1. विवादित आदेश तत्काल वापस लिया जाए।
  2. सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए।
  3. छात्रों से जुड़े सभी फैसले पारदर्शी और विधिसम्मत प्रक्रिया से लिए जाएं।

राजभवन से हस्तक्षेप की मांग

ABVP ने राज्यपाल सह कुलाधिपति से भी इस पूरे प्रकरण पर संज्ञान लेने की मांग की है। परिषद का आरोप है कि कुछ पदाधिकारी जानबूझकर शैक्षणिक वातावरण बिगाड़ रहे हैं और छात्रों के बीच तनाव पैदा कर रहे हैं। ऐसे अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई और बर्खास्तगी की भी मांग की गई है।


आंदोलन की चेतावनी

परिषद ने साफ किया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द आदेश वापस नहीं लिया, तो छात्रहित में आंदोलन किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

ABVP का संदेश:

“छात्रहित सर्वोपरि है। किसी भी तरह का भ्रम, अन्याय या दमन स्वीकार नहीं किया जाएगा।”


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