अब कतरनी की खुशबू देश-दुनिया तक जाएगी.. एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन में शामिल, भागलपुर बनेगा प्रोसेसिंग हब

भागलपुर।बिहार बजट 2026-27 में भागलपुर की पहचान कतरनी चावल को नई उड़ान मिल गई है। राज्य सरकार ने कतरनी को बिहार एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन में शामिल कर लिया है। इसके तहत अब कतरनी के लिए कटाई-छंटाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जा सकेगी। इससे न केवल किसानों को बेहतर दाम मिलेगा, बल्कि कतरनी का निर्यात भी तेजी से बढ़ेगा।

अब सीधे खेत से ब्रांड बनेगी कतरनी

सरकार की योजना है कि धान उत्पादों को अलग-अलग स्वरूपों में ढालने के लिए अत्याधुनिक यूनिट स्थापित की जाए।

  • कटाई-छंटाई यूनिट – खराब दानों को हटाने के लिए
  • ग्रेडिंग यूनिट – गुणवत्ता के आधार पर वर्गीकरण
  • प्रोसेसिंग सेंटर – चावल को बाजार के अनुकूल तैयार करने के लिए
  • पैकेजिंग यूनिट – ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए

जीआई टैग उत्पादों को मिलेगा संगठित बाजार

राज्य सरकार ने बिहार कृषि एक्सीलेरेशन मिशन भी बनाया है, ताकि जीआई टैग उत्पादों को एकीकृत बाजार मिल सके। इसमें शामिल हैं—

  • कतरनी चावल
  • मखाना
  • जर्दालू आम
  • भागलपुर सिल्क
  • मंजूषा पेंटिंग

सरकार इन सभी उत्पादों के लिए मार्केटिंग सपोर्ट और निर्यात प्लेटफॉर्म तैयार करेगी।

कतरनी का रकबा दोगुना

भागलपुर में कतरनी की खेती तेजी से बढ़ी है।

  • पहले: 1000–1200 हेक्टेयर
  • अब: करीब 2000 हेक्टेयर

कतरनी उत्पादक किसान राजकुमार पंजियारा कहते हैं—
“अब तक हमें सही दाम नहीं मिल पाता था। कई बार औने-पौने में बेचनी पड़ती थी। अगर प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट लग गई तो हमारी आमदनी बढ़ेगी और निर्यात भी होगा।”

जर्दालू आम भी जाएगा विदेश

बिहार कृषि एक्सीलेरेशन मिशन के तहत जर्दालू आम की ग्रेडिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग होगी।
भागलपुर के किसान कृष्णानंद पहले ही ब्रिटेन की मंडी में जर्दालू भेज चुके हैं, जहां इसकी जमकर सराहना हुई थी। अब सरकार की मदद से इसका निर्यात और बढ़ेगा।

चार जीआई उत्पादों को मिलेगा फायदा

भागलपुर के चार जीआई टैग उत्पाद—

  • कतरनी चावल
  • जर्दालू आम
  • भागलपुर सिल्क
  • मंजूषा कला

अब इन्हें देश-विदेश के बाजार से जोड़ा जाएगा।
मंजूषा गुरु मनोज पंडित कहते हैं—
“इससे सैकड़ों कलाकारों को रोजगार मिलेगा और मंजूषा कला को वैश्विक पहचान मिलेगी।”


कुल मिलाकर:
यह मिशन केवल खेती नहीं, बल्कि ग्रामीण उद्योग, निर्यात और रोजगार की नई राह खोलेगा। अब कतरनी सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश-दुनिया की थाली तक पहुंचेगी।

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