एक क्लिक में होगा सहकारिता का सारा काम, 38 जिलों में शुरू हुई डिजिटल व्यवस्था
पटना, 02 फरवरी।
अब सहकारिता विभाग में महीनों तक फाइलें ढूंढने, चक्कर लगाने और कागजी अड़चनों का दौर खत्म होने वाला है। बिहार के निबंधक, सहयोग समितियां कार्यालय और राज्य के सभी 38 जिला सहकारिता पदाधिकारियों के कार्यालय पूरी तरह कंप्यूटरीकृत हो चुके हैं।
केंद्र प्रायोजित योजना “सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से सहकारी समितियों का सुदृढ़ीकरण” के तहत यह बड़ा बदलाव किया गया है। सोमवार को सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने विकास भवन स्थित अपने कार्यालय से पोर्टल http://ercs.bihar.gov.in को ऑनलाइन कर इसका औपचारिक शुभारंभ किया।
अब क्या-क्या होगा ऑनलाइन?
पोर्टल के लाइव होते ही सहकारिता से जुड़े लगभग सभी काम अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होंगे—
- सहकारी समितियों का निबंधन
- उपविधियों में संशोधन
- वार्षिक रिपोर्ट और रिटर्न
- सदस्यता व अपील
- विवादों का निस्तारण
- अंकेक्षण व लेखों का परीक्षण
- परिसमापन
- शिकायत निवारण
- निर्वाचन प्रक्रिया
- परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली
अब इन सभी सेवाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
“सहकार से समृद्धि” की दिशा में बड़ा कदम
इस मौके पर मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि यह पहल पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगी। सहकारिता विभाग के कार्य अब तेज, सरल और नागरिकों के लिए सुगम होंगे।
उन्होंने कहा, “यह डिजिटल व्यवस्था ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगी।”
2.74 करोड़ की लागत से बना डिजिटल सिस्टम
इस परियोजना पर करीब 2.74 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके तहत—
- हार्डवेयर की खरीद
- आधुनिक सॉफ्टवेयर का विकास
- क्लाउड स्टोरेज और आधारभूत आईटी संरचना
तैयार की गई है, जिससे डेटा सुरक्षित और हमेशा उपलब्ध रहेगा।
पारदर्शिता बढ़ेगी, काम होगा तेज
नई व्यवस्था से न सिर्फ विभागीय कामकाज में तेजी आएगी, बल्कि आम नागरिकों को भी सहकारिता योजनाओं और सेवाओं की जानकारी एक क्लिक में मिल सकेगी।
इस अवसर पर निबंधक सहयोग समितियां श्री रजनीश कुमार सिंह सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
निष्कर्ष:
अब सहकारिता विभाग भी डिजिटल बिहार की राह पर आगे बढ़ चुका है—जहां फाइलों की जगह क्लिक, और इंतजार की जगह तुरंत सेवा होगी।


