सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड का मामला, इंटर मार्कशीट सत्यापन में खुला फर्जीवाड़ा
सहरसा। जिले में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी पाने वाले शिक्षकों पर निगरानी विभाग ने शिकंजा कस दिया है। सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के तीन नियोजित शिक्षकों की इंटरमीडिएट मार्कशीट बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से सत्यापन के दौरान फर्जी पाई गई। इसके बाद बलवाहाट थाने में तीनों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। कार्रवाई से शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है।
ऐसे खुली पोल
निगरानी विभाग वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन करा रहा है। इसी क्रम में सिमरी बख्तियारपुर के तीन शिक्षकों के दस्तावेज बोर्ड से मिलान कराए गए, जिसमें बड़े अंतर सामने आए—
- कान्ति कुमारी
- आवेदन में: 600 अंक, फर्स्ट डिवीजन
- सत्यापन में: 595 अंक, रोल नंबर अलग
- राजेश ठाकुर
- आवेदन में: 570 अंक, फर्स्ट डिवीजन
- सत्यापन में: 565 अंक
- मदन ठाकुर
- आवेदन में: 568 अंक
- सत्यापन में: 564 अंक, साथ ही ‘रिमार्क्स’ कॉलम में गड़बड़ी
इन विसंगतियों के आधार पर तीनों पर दस्तावेजों में हेराफेरी कर नियुक्ति पाने का आरोप तय किया गया है।
निगरानी विभाग की चेतावनी
निगरानी विभाग ने स्पष्ट किया है कि हर शिक्षक के प्रमाण पत्र की बारीकी से जांच की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य शिक्षकों में भी दहशत और हलचल है।
आगे क्या?
- एफआईआर के बाद जांच तेज होगी
- दोष सिद्ध होने पर सेवा से बर्खास्तगी और आपराधिक कार्रवाई संभव


