नई दिल्ली। उत्तर रेलवे के सबसे व्यस्त और हाई-डेंसिटी कॉरिडोर तुगलकाबाद जंक्शन केबिन (दिल्ली क्षेत्र) से पलवल के बीच अब ट्रेनों की सुरक्षा और मजबूत हो गई है। इस 35 किलोमीटर लंबे सेक्शन में स्वदेशी कवच (Automatic Train Protection System) को सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है।
गुरुवार को उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक अशोक कुमार वर्मा ने खुद मौके पर पहुंचकर सिस्टम का निरीक्षण किया और पांच अहम सुरक्षा टेस्ट कराए।
यह सेक्शन दिल्ली उपनगरीय, लंबी दूरी और मालगाड़ियों के लिए बेहद व्यस्त माना जाता है। यहां कुल 152 मेन लाइन ट्रैक किलोमीटर पर कवच लगाया गया है, जिसमें स्टेशन यार्ड, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग वाली दो मेन लाइनें और एब्सोल्यूट ब्लॉक सिग्नलिंग वाली दो लाइनें शामिल हैं।
पांच लाइव टेस्ट, हर खतरे पर कवच तैयार
निरीक्षण के दौरान कवच की क्षमता को परखने के लिए पांच अलग-अलग परिस्थितियां बनाई गईं—
1. SPAD टेस्ट (रेड सिग्नल पार करने की कोशिश):
लोको पायलट ने जानबूझकर रेड सिग्नल पार करने का प्रयास किया, लेकिन कवच ने सिग्नल से पहले ही ट्रेन को रोक दिया।
2. हेड-ऑन कोलिजन टेस्ट:
एक ही ट्रैक पर दो लोको आमने-सामने खड़े किए गए। तय दूरी से काफी पहले कवच ने दोनों को रोक दिया।
3. रियर-एंड कोलिजन टेस्ट:
पीछे से टक्कर की स्थिति बनाई गई, लेकिन कवच ने लोको को पीछे जाने से ही रोक दिया।
4. ओवरस्पीड टेस्ट:
लोको को 120 किमी/घंटा की रफ्तार से लूप लाइन में चलाया गया। सिस्टम ने स्पीड घटाकर 20 किमी/घंटा कर दी।
5. लेवल क्रॉसिंग टेस्ट:
फाटक खुला दिखाया गया, कवच ने ट्रेन को फाटक से पहले ही रोक दिया।
यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा: GM
महाप्रबंधक अशोक कुमार वर्मा ने कहा,
“यह कमीशनिंग देश के सबसे व्यस्त कॉरिडोर में बड़ा सेफ्टी अपग्रेड है। इससे ऑपरेशनल सेफ्टी, विश्वसनीयता और यात्रियों का भरोसा तीनों बढ़ेंगे।”
क्या है ‘कवच’?
- यह स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है।
- आपात स्थिति में अपने आप ब्रेक लगाता है।
- आमने-सामने, पीछे से टक्कर और रेड सिग्नल पार करने जैसी घटनाओं से बचाता है।
- ओवरस्पीडिंग पर नजर रखकर स्पीड कंट्रोल करता है।
- कम दृश्यता और खराब मौसम में भी सुरक्षा देता है।
- SIL-4 सेफ्टी लेवल, जो दुनिया का सबसे ऊंचा मानक है।
आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम
कवच देश में ही डिजाइन और विकसित किया गया है। यह आयातित तकनीक पर निर्भरता कम करता है और भारतीय सिग्नलिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा देता है।
भारतीय रेलवे अब इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे नेटवर्क पर लागू कर रही है।
यह कदम सुरक्षित, भरोसेमंद और आत्मनिर्भर भारतीय रेलवे की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।


