बिहार कैबिनेट की बैठक में आज कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के दो अहम प्रस्तावों को मंत्रिपरिषद की स्वीकृति मिली है। कैबिनेट ने भूमि सुधार उप समाहर्ता के पदनाम में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
राज्य में जिलों एवं अनुमंडल स्तर पर भूमि राजस्व से जुड़े कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन और जिला व अनुमंडल के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से 101 पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई है। इसके तहत बिहार प्रशासनिक संवर्ग की मूल कोटि में भूमि सुधार उप समाहर्ता के 101 पद स्थायी रूप से सृजित किए गए हैं।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अंतर्गत भूमि सुधार उप समाहर्ताओं को भूमि सुधार कार्यक्रमों का संचालन, भूमि विवादों का निपटारा, दाखिल-खारिज एवं अपील वादों की सुनवाई, भू-राजस्व वसूली, भू-लगान निर्धारण, गैर मजरूआ मालिक और बकाश्त भूमि पर रैयती दावों का निपटारा, भू-हदबंदी वादों की सुनवाई तथा भू-दान भूमि से जुड़े दान पत्रों की संपुष्टि जैसे महत्वपूर्ण कार्य सौंपे जाते हैं।
विभागीय समीक्षा बैठकों में यह लगातार विचार सामने आता रहा है कि अनुमंडल स्तर पर सृजित भूमि सुधार उप समाहर्ता एवं समकक्ष पद का नाम बदलकर “अनुमंडल राजस्व पदाधिकारी” किया जाए, ताकि पदनाम अधिकारी के कार्य एवं दायित्वों के अनुरूप हो सके।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद “अनुमंडल राजस्व पदाधिकारी” को अंचल कार्यालयों एवं कर्मचारियों का निरीक्षण, लेखा जांच, भू-राजस्व वसूली का पर्यवेक्षण, सैरातों की बंदोबस्ती, ई-मापी, परिमार्जन प्लस, भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र, लोक भूमि की सुरक्षा, भू-अभिलेख डिजिटाइजेशन, भू-सर्वेक्षण का पर्यवेक्षण तथा लोक सेवाओं का अधिकार से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
इसके साथ ही बिहार राजस्व सेवा नियमावली, 2010 में प्रयुक्त पदनाम “भूमि सुधार उप समाहर्ता” के स्थान पर “अनुमंडल राजस्व पदाधिकारी” किया जाएगा और इसके कार्य व दायित्व भी औपचारिक रूप से निर्धारित किए जाएंगे।


