
बाढ़ पीड़ितों को अब 7 हजार की मदद, 130 रैन बसेरों से 38 हजार लोगों को राहत
पटना।राज्य में आपदा से निपटने के लिए सरकार बड़ा कदम उठा रही है। बिहार के सभी जिलों में आपातकालीन प्रतिक्रिया सुविधा-सह-प्रशिक्षण केंद्र (ERF-TC) बनाए जा रहे हैं। पहले चरण में चिन्हित 18 जिलों में से 17 जिलों में भवन निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि पटना में काम प्रगति पर है। अब शेष 20 जिलों में भी जल्द निर्माण शुरू होगा।
यह जानकारी आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव मो. नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी ने सूचना भवन में प्रेस वार्ता के दौरान दी।
उन्होंने बताया कि इन केंद्रों पर SDRF की टीम तैनात रहेगी, जो आपदा की स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य करेगी, साथ ही आम लोगों को भी प्रशिक्षित करेगी।
बाढ़ पीड़ितों को अब 7 हजार रुपये की राहत
संयुक्त सचिव ने बताया कि अब बाढ़ से प्रभावित परिवारों को 6 हजार की जगह 7 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।
वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक 9.71 लाख परिवारों को 680.17 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
10 जिलों में 100 बाढ़ आश्रय स्थल
मुख्यमंत्री राहत कोष से राज्य के 10 अति बाढ़ प्रभावित जिलों में 100 स्थायी बाढ़ आश्रय स्थल बनाए जा रहे हैं।
अब तक 96 आश्रय स्थल पूरे हो चुके हैं, बाकी जल्द बनेंगे।
डूबने से मौत रोकने को तैराकी प्रशिक्षण
सरकार ने वर्ष 2030 तक डूबने से होने वाली मौतों में 50% की कमी का लक्ष्य तय किया है।
इसके लिए 6–10 और 11–18 वर्ष के बच्चों के लिए सुरक्षित तैराकी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।
ठंड से राहत: 130 रैन बसेरे, 80 हजार कंबल
शीतलहर से बचाव के लिए राज्य में 130 रैन बसेरे बनाए गए, जहां 38,700 लोग ठहरे।
इसके अलावा 80 हजार गरीबों में कंबल बांटे गए।
इस वर्ष ठंड से मौत का आंकड़ा शून्य रहा है।
आपदा से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण
- 5 जिलों में 483 ग्रामीण स्वास्थ्य समन्वयक प्रशिक्षित
- 2241 आंगनबाड़ी सेविकाओं को प्रशिक्षण
- 482 स्वास्थ्य कर्मियों का जोखिम प्रबंधन प्रशिक्षण
- 5000 श्रमिकों को आग से बचाव की ट्रेनिंग
- 16,374 युवाओं को तैराकी प्रशिक्षण
- 1745 राजमिस्त्रियों को सुरक्षित निर्माण प्रशिक्षण
- 148 स्कूलों में 31 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को सुरक्षा प्रशिक्षण
संयुक्त सचिव ने कहा कि आपदा प्रबंधन विभाग, SDRF, NDRF, BSDMA, DMI और सिविल डिफेंस के सहयोग से यह अभियान पूरे राज्य में चलाया जा रहा है ताकि किसी भी आपदा में जान-माल का नुकसान न्यूनतम हो।


