बक्सर सदर अस्पताल निरीक्षण के दौरान भड़के बीजेपी विधायक आनंद मिश्रा, सिविल सर्जन को लगाई कड़ी फटकार

बिहार के बक्सर जिले में उस वक्त माहौल गरमा गया जब भारतीय जनता पार्टी के सदर विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा ने निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन शिवकुमार प्रसाद चक्रवर्ती को कड़े शब्दों में फटकार लगाई। यह पूरा घटनाक्रम जिलाधिकारी साहिला की मौजूदगी में हुआ, जहां विधायक ने सिविल सर्जन को “निठल्ला” तक कह डाला।

निरीक्षण के दौरान आपा खो बैठे विधायक

घटना रविवार की है, जब सदर विधायक आनंद मिश्रा छुट्टी के दिन बक्सर सदर अस्पताल पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और सिविल सर्जन पर सीधे तौर पर लापरवाही और कथित कुकृत्यों के आरोप लगाए। विधायक के तीखे और सख्त अंदाज से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और मौके पर मौजूद अधिकारी व कर्मचारी सन्न रह गए।

रिश्वत के आरोपों पर दी कड़ी प्रतिक्रिया

विधायक आनंद मिश्रा ने कहा कि सदर अस्पताल से जुड़े एक मामले में उन पर ढाई लाख रुपये रिश्वत लेकर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया है, जो पूरी तरह निराधार है। उन्होंने इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश बताया।

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा,
“आज तक न तो मेरी वर्दी पर दाग लगा है और न ही जो पोशाक आज पहनी है, उस पर आगे भी दाग लगने दूंगा।”

सिविल सर्जन पर सीधे आरोप

विधायक ने सिविल सर्जन को संबोधित करते हुए कहा,
“आप जान ही रहे हैं कि आप एकदम निठल्ले हैं। कुछ नहीं करते हैं, यही आपकी पहचान है। आपके कुकर्मों के चलते हम पर आरोप लगाए जा रहे हैं। हम आपसे ज्यादा पाक हैं, यह जान लीजिए। अपनी वर्दी पर कभी दाग नहीं लगने दिया और आगे भी नहीं लगने देंगे।”

अधिकारियों की चुप्पी बनी चर्चा का विषय

इस दौरान वीडियो में जिलाधिकारी साहिला, अपर समाहर्ता समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी पूरे समय मौन नजर आए। विधायक की सख्ती और अधिकारियों की चुप्पी का यह दृश्य अब सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

महिला की मौत से जुड़ा है पूरा मामला

इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि हाल ही में सदर अस्पताल में एक महिला की मौत से जुड़ी है। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने बक्सर–चौसा मुख्य मार्ग को जाम कर दिया था। इसी दौरान एक युवक ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि अस्पताल कर्मियों की कथित चोरी पकड़े जाने के बावजूद विधायक ने ढाई लाख रुपये लेकर कार्रवाई नहीं होने दी। यह आरोप मीडिया में सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया।

स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

रविवार को छुट्टी के दिन अस्पताल पहुंचकर विधायक ने न सिर्फ व्यवस्थाओं की जांच की, बल्कि स्वास्थ्य विभाग और सिविल सर्जन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। अब इस पूरे मामले को लेकर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी नजरें टिकी हुई हैं।


 

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