नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित भारत पर्व में इस बार बिहार अपनी अनोखी पहचान के साथ नजर आएगा। लाल किले में 23 से 31 जनवरी तक चलने वाले इस आयोजन में बिहार की झांकी का विषय होगा—
“मखाना: लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड”।
यह झांकी बिहार के सफेद सोने कहे जाने वाले मखाना की पूरी यात्रा को दर्शाएगी—मिथिला के तालाबों से लेकर दुनिया की थाली तक।
मिथिला से विश्व तक मखाना की कहानी
मखाना, जिसे फॉक्स नट या कमल बीज भी कहा जाता है, आज वैश्विक सुपरफूड के रूप में पहचाना जा रहा है। दुनिया में होने वाले कुल मखाना उत्पादन का करीब 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा बिहार देता है। वर्ष 2022 में मिथिला मखाना को GI टैग मिलने से इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
दो हिस्सों में झांकी
झांकी को दो भागों में तैयार किया गया है—
पहले हिस्से में कमल के पत्तों के बीच सफेद लावा मखाना, GI टैग का प्रतीक और मिथिला पेंटिंग की बॉर्डर दिखाई देगी।
दूसरे हिस्से में मखाना की पूरी प्रक्रिया—कटाई, बीज संग्रह, भुनाई, फोड़ाई, पैकिंग और गुणवत्ता जांच—को जीवंत रूप में दिखाया जाएगा।
एक ओर मिट्टी के चूल्हे पर मखाना भूनती महिला, दूसरी ओर लकड़ी के मूसल से फोड़ता पुरुष—यह दृश्य महिला सहभागिता और स्थानीय श्रम को दर्शाता है।
केंद्रीय बजट में मखाना को बड़ी सौगात
केंद्रीय बजट 2025–26 में बिहार के मखाना किसानों के लिए बड़ी घोषणा हुई है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना और ₹475 करोड़ के विकास पैकेज को मंजूरी दी है। इससे उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात को नई गति मिलेगी।
पोषण का खजाना
मखाना प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है। यह मधुमेह नियंत्रण, वजन प्रबंधन और हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक है। कम कैलोरी और कम वसा वाला यह पौध-आधारित सुपरफूड अब दुनिया में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
बिहार का ग्लोबल संदेश
भारत पर्व में बिहार की यह झांकी सिर्फ एक उत्पाद की नहीं, बल्कि परंपरा, परिश्रम और प्रगति की कहानी है। यह दिखाती है कि कैसे स्थानीय आजीविका वैश्विक बाजार तक पहुंच सकती है।
बिहार का मखाना अब सिर्फ तालाब का उत्पाद नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक पहचान बनता जा रहा है।


