भागलपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) भागलपुर इकाई द्वारा स्थानीय कार्यालय में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश सह मंत्री कुणाल पाण्डेय ने कहा कि 17 जनवरी को आयोजित विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक के दौरान ABVP ने कुलपति को ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय में व्याप्त समस्याओं के समाधान की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के कुलानुशासक एस.डी. झा और छात्र कल्याण पदाधिकारी अर्चना साह द्वारा जानबूझकर ABVP कार्यकर्ताओं को दिग्भ्रमित किया गया और उनकी बातों को अनसुना किया गया।
छात्रावासों से अवैध छात्रों को हटाने की मांग
प्रदेश सह मंत्री ने कहा कि ABVP की पुरानी मांग है कि छात्रावासों में अवैध रूप से रह रहे छात्रों को तत्काल हटाया जाए, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने सवाल किया कि जब छात्रावास अधीक्षकों की संलिप्तता सामने आ चुकी है, तो अब तक सभी अधीक्षकों को क्यों नहीं बदला गया।
उन्होंने ABVP कार्यकर्ताओं पर दर्ज कथित झूठे मुकदमों को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
Ph.D. अनियमितता प्रकरण पर बड़ा खुलासा
प्रेस वार्ता में ABVP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हैप्पी आनंद ने विश्वविद्यालय में सामने आए Ph.D. अनियमितता प्रकरण को गंभीर बताते हुए कहा कि यह मामला कथित अवैध पंजीकरण और गैरकानूनी थीसिस जमा से जुड़ा है।
उन्होंने बताया कि इस प्रकरण के मुख्य आरोपी निरलेश कुमार, सहायक प्राध्यापक, समाजशास्त्र विभाग, टी.एन.बी. कॉलेज और विश्वविद्यालय सिंडिकेट सदस्य हैं। उनका Ph.D. पंजीकरण परिवीक्षा अवधि के दौरान किया गया था, जबकि नियमों के अनुसार यह पूरी तरह निषिद्ध है।
उन्होंने कहा कि जांच के बाद विश्वविद्यालय ने आदेश संख्या CCDC-16/21 दिनांक 04 सितंबर 2021 के तहत उनका पंजीकरण रद्द कर दिया था, जो आज भी प्रभावी है। इसके बावजूद वर्ष 2025 में रद्द पंजीकरण के आधार पर उनकी Ph.D. थीसिस स्वीकार कर ली गई, जो विश्वविद्यालय आदेश, यूनिफॉर्म Ph.D. ऑर्डिनेंस और UGC नियमों का उल्लंघन है।
जालसाजी का आरोप
हैप्पी आनंद ने आरोप लगाया कि रद्द दस्तावेजों और पुराने कोर्सवर्क प्रमाण-पत्र का पुनः उपयोग कर जालसाजी की गई, जिसमें शोध-पर्यवेक्षक डॉ. संगीत कुमार और समाजशास्त्र विभाग की भूमिका भी संदिग्ध है।
ABVP ने इस पूरे प्रकरण में IPC की धारा 420, 468, 471, 120B, 166 और 409 के तहत आपराधिक कार्रवाई की मांग की।
ABVP की प्रमुख मांगें
- आरोपी शिक्षक को तत्काल सेवा से मुक्त किया जाए।
- उनकी सिंडिकेट सदस्यता रद्द की जाए।
- अवैध रूप से स्वीकार की गई Ph.D. थीसिस और उससे जुड़े सभी निर्णय निरस्त किए जाएं।
- अन्य दोषियों पर भी अनुशासनात्मक और आपराधिक कार्रवाई की जाए।
अन्य मुद्दे भी उठाए
विभाग संयोजक अनुज चौरसिया ने मांग की कि एनएसएस में पिछले तीन वर्षों की वित्तीय अनियमितताओं की जांच कराई जाए। साथ ही नवगछिया में पीजी की पढ़ाई अविलंब शुरू करने की मांग की।
नगर मंत्री पियूष भारती ने मारवाड़ी कॉलेज प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ताओं को मीडिया के जरिए टारगेट किया जा रहा है, जबकि कॉलेज में लगातार मारपीट, सीसीटीवी की कमी और छात्र सुरक्षा जैसे मूलभूत मुद्दों पर प्रशासन मौन है।
ABVP नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन करेगा।


