क्यों सरस्वती पूजा को कहा जाता है बंगाल का अनौपचारिक वैलेंटाइन डे?

पश्चिम बंगाल में सरस्वती पूजा केवल विद्या और ज्ञान की देवी की आराधना तक सीमित नहीं है। यह दिन युवाओं के लिए दोस्ती, अपनापन और रिश्तों की मिठास से जुड़ा एक खास मौका भी बन चुका है। यही वजह है कि बसंत पंचमी को यहां अक्सर ‘बंगाल का अनौपचारिक वैलेंटाइन डे’ कहा जाता है।

किताबों से एक दिन की दूरी, दिलों की नज़दीकी का त्योहार

सरस्वती पूजा के दिन छात्र-छात्राएं अपनी किताबें और कॉपियां मां सरस्वती के चरणों में अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस दिन पढ़ाई नहीं की जाती, जिससे छात्रों को पढ़ाई के दबाव से एक दिन की राहत मिलती है।
यह राहत सिर्फ पढ़ाई से नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की भागदौड़ से भी होती है। पूजा के बाद पूरा दिन दोस्तों के नाम होता है, जहां हंसी, बातचीत और अपनापन खुलकर नजर आता है।

पूजा से दोस्तों तक का सफर

हालांकि स्कूल और कॉलेज खुले रहते हैं, लेकिन माहौल पढ़ाई वाला नहीं होता। पारंपरिक कपड़ों में सजे युवा पंडालों में घूमते दिखाई देते हैं। दोस्तों के साथ समय बिताना, साथ घूमना और साथ खाना—यह सब इस दिन की पहचान बन चुका है। कई युवाओं के लिए यही दिन पहली मुलाकात या पहली डेट की याद बन जाता है।

पीले रंग में सजा बसंत और रिश्तों की गर्माहट

बसंत पंचमी का रंग पीला माना जाता है और बंगाल में यह रंग हर तरफ दिखाई देता है। लड़कियां पीली या हल्के रंग की साड़ियों में और लड़के कुर्ता-पायजामा में नजर आते हैं। कई युवा जोड़े एक जैसे रंग के कपड़ों में साथ घूमते दिखते हैं। यह दृश्य बसंत की खूबसूरती को और बढ़ा देता है।

बसंत ऋतु और मोहब्बत का मेल

सर्दियों की विदाई, खिलते फूल और सुहावना मौसम, बसंत पंचमी को स्वाभाविक रूप से रोमांटिक बना देता है। पेड़ों के नीचे बैठकर बातें करना, सड़क किनारे फुचका या आइसक्रीम खाना और बिना किसी दिखावे के साथ समय बिताना—यही इस दिन की असली पहचान है। कई बार हल्की-सी पसंद इसी दिन गहरे रिश्ते की शुरुआत बन जाती है।

क्यों कहा जाता है ‘बंगाली वैलेंटाइन डे’

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल पंचमी को सरस्वती पूजा मनाई जाती है। देवी सरस्वती ज्ञान, संगीत और कला की देवी हैं, लेकिन बंगाल में यह पूजा समय के साथ एक सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले चुकी है।
जहां वैलेंटाइन डे को कई लोग व्यावसायिक मानते हैं, वहीं सरस्वती पूजा आज भी सादगी, परंपरा और भावनाओं से जुड़ी हुई है।

कोलकाता समेत पूरे बंगाल में यह दिन सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं के लिए रिश्तों को समझने और महसूस करने का अवसर भी है। शायद इसी वजह से इसे बंगाल का अनौपचारिक वैलेंटाइन डे कहा जाता है—जहां प्यार दिखावे से नहीं, सादगी से झलकता है।


 

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