भोजपुर का 12 वर्षीय कार्तिक बना मिसाल, वेस्ट मटेरियल से बनाई मां सरस्वती की जीवंत प्रतिमा

बिहार के भोजपुर जिले में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जहां आज के दौर में अधिकतर बच्चे मोबाइल और वीडियो गेम में व्यस्त रहते हैं, वहीं आरा सदर प्रखंड के मखदुमपुर पंचायत अंतर्गत बड़का डुमरा गांव के 12 वर्षीय कार्तिक ने अपनी रचनात्मक सोच और कला प्रतिभा से सभी को हैरान कर दिया है।

वेस्ट मटेरियल से बनी अनोखी प्रतिमा

कक्षा सातवीं का छात्र कार्तिक ने वेस्ट मटेरियल का उपयोग कर मां सरस्वती की एक अद्भुत प्रतिमा तैयार की है। यह प्रतिमा न सिर्फ कलात्मक दृष्टि से आकर्षक है, बल्कि इसमें गहरा सांस्कृतिक और शैक्षिक संदेश भी छिपा है। प्रतिमा में मां सरस्वती को ऋषि वाल्मीकि को ग्रंथ लेखन के लिए प्रेरित करते हुए दिखाया गया है, जो ज्ञान, साहित्य और सृजन की परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।

घूमती प्रतिमा ने सबको किया प्रभावित

इस प्रतिमा की खास बात यह है कि इसमें पुराने मोटर की मदद से कुछ हिस्सों को गतिशील बनाया गया है। वहीं एक महिला श्रद्धा भाव से थाली लेकर सरस्वती वंदना करती नजर आती है, जो भारतीय संस्कृति में ज्ञान की उपासना का प्रतीक है।

कार्तिक ने बताया—

“मैंने खुद से मां सरस्वती की प्रतिमा बनाई है। दुर्गा पूजा में ऐसा आइडिया आया था। उसी तरह मैंने मूर्ति को जीवंत बनाने की कोशिश की। इसमें सब कुछ मोटर लगाकर घुमाया जा रहा है।”

10 दिनों की मेहनत, पिता का मिला सहयोग

कार्तिक के पिता नीलेश कुमार श्रीवास्तव, जो पेशे से निजी बिजली मिस्त्री हैं, बताते हैं कि इस प्रतिमा को बनाने में फोम, पुराने मोटर, रस्सी और पुराने कपड़ों जैसे बेकार समझे जाने वाले सामानों का उपयोग किया गया है। करीब 10 दिनों की मेहनत के बाद यह प्रतिमा तैयार हुई।

नीलेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा—

“मेरे बेटे ने जैसा कहा, मैंने वैसा ही सहयोग किया। सारी कारीगरी उसी की है। सभी सामान पुराने हैं, लेकिन बेटे की मेहनत ने उन्हें खास बना दिया।”

वैज्ञानिक बनने का सपना

कार्तिक का सपना है कि वह आगे चलकर वैज्ञानिक बने और समाज के लिए कुछ नया करे। उसकी यह कलाकृति न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण और रीसाइक्लिंग का संदेश देती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। गांव में कार्तिक की इस कला की जमकर सराहना हो रही है।

23 जनवरी को सरस्वती पूजा

बता दें कि शुक्रवार, 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजा मनाई जाएगी। मान्यता है कि इसी दिन ज्ञान, बुद्धि और विद्या की देवी मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। बिहार में इस दिन पूरे विधि-विधान से सरस्वती पूजा की जाती है।


 

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