भागलपुर अब महामारी जांच के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (JLNMCH) में जल्द ही वायरल अनुसंधान एवं निदान प्रयोगशाला (VRDL) की स्थापना की जाएगी। इस लैब के बन जाने से अब कोरोना, डेंगू, चिकनगुनिया समेत अन्य वायरल बीमारियों के सैंपल जांच के लिए पटना या दूसरे बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। भागलपुर और आसपास के जिलों के लिए यह लैब एक बड़ा राहत केंद्र साबित होगी।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अविलेश कुमार ने बताया कि इस परियोजना के लिए करीब दो करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर दी गई है। इसके अलावा 50 लाख रुपये की लागत से लैब का आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज परिसर में जिस हिस्से में अभी जिम संचालित हो रहा है, उसी स्थान पर इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला का निर्माण होगा।
जून तक शुरू करने का लक्ष्य
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सहयोग से VRDL लैब को जून तक पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण और मशीन इंस्टॉलेशन का काम जल्द शुरू होगा। माइक्रोबायोलॉजी विभाग इस लैब का संचालन करेगा। इसके लिए रिसर्च साइंटिस्ट, लैब टेक्नीशियन और डाटा एंट्री ऑपरेटर की तैनाती भी की जाएगी।
वायरस के वैरिएंट की भी होगी पहचान
इस लैब में न केवल वायरल बीमारियों की जांच होगी, बल्कि उनके वैरिएंट की पहचान भी की जा सकेगी। इससे यह पता चल सकेगा कि इलाके में कौन सा स्ट्रेन ज्यादा फैल रहा है और कितना खतरनाक है। इससे समय रहते अलर्ट जारी कर इलाज और रोकथाम के कदम उठाए जा सकेंगे।
महामारी पर बनेगी मजबूत निगरानी व्यवस्था
VRDL लैब के जरिए भागलपुर और आसपास के जिलों में वायरल बीमारियों पर एक मजबूत सर्विलांस नेटवर्क तैयार होगा। हर संदिग्ध सैंपल की रिपोर्ट समय पर मिलेगी, जिससे स्वास्थ्य विभाग को त्वरित निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
अब तक गंभीर सैंपल को पटना या दिल्ली भेजना पड़ता था, जिसमें कई दिन लग जाते थे। नई लैब शुरू होने के बाद रिपोर्ट 24 से 48 घंटे के भीतर मिलने की संभावना है। इससे मरीजों को सही समय पर इलाज मिलेगा और संक्रमण के फैलाव को भी रोका जा सकेगा।
क्षेत्र के लिए मील का पत्थर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह लैब भागलपुर ही नहीं, बल्कि पूरे कोसी-सीमांचल क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी। भविष्य में किसी भी महामारी से निपटने में यह केंद्र अहम भूमिका निभाएगा।


