नाथनगर के मथुरापुर में हुआ भव्य आयोजन
नाथनगर प्रखंड के गोसाईंदासपुर पंचायत अंतर्गत मथुरापुर स्थित महर्षि मेही आश्रम में दो दिवसीय पंचायत संतमत सत्संग के 13वें वार्षिक अधिवेशन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालु, संत-समाज और आयोजन समिति के सदस्य शामिल हुए। पूरे आश्रम परिसर में भक्ति, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण देखने को मिला।
भजन, प्रवचन और सद्ग्रंथ पाठ का आयोजन
अधिवेशन के दौरान संतमत परंपरा के अनुरूप भजन, स्तुति, विनती, सद्ग्रंथ पाठ एवं प्रवचनों का आयोजन किया गया। संतों के प्रवचनों को सुनने के लिए श्रद्धालु पूरे मनोयोग से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आध्यात्मिक विषयों पर गहन चर्चा हुई, जिससे उपस्थित लोगों को आत्मिक शांति और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
मनुष्य जीवन का सदुपयोग करने का संदेश
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मनुष्य जीवन बड़े भाग्य से प्राप्त होता है और इसका सदुपयोग करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। संतों ने अपने प्रवचनों में बताया कि मृत्यु सबसे बड़ा सत्य है, लेकिन मनुष्य उससे बचने की कोशिश करता है। ऐसे में आवश्यक है कि व्यक्ति सद्कर्म करे और सात्विक जीवन अपनाए, जिससे अच्छे संस्कारों की प्राप्ति हो सके।
महर्षि मेही के विचारों को जीवन में उतारने की अपील
संतों ने श्रद्धालुओं से महर्षि मेही के संदेशों को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को मनुष्य बनकर जीना चाहिए, सद्विचार रखना चाहिए और समाज में सद्भाव और प्रेम का भाव बनाए रखना चाहिए। वक्ताओं ने यह भी कहा कि बिना गुरु और उचित मार्गदर्शन के कोई भी व्यक्ति पूर्ण ज्ञान या विशेषज्ञता प्राप्त नहीं कर सकता।
ग्रामीणों की रही बड़ी सहभागिता
इस अवसर पर गोसाईंदासपुर पंचायत की मुखिया पिंकी देवी, सच्चिदानंद शर्मा, पूर्व पंचायत समिति सदस्य तार्केश्वर झा, कबीर पासवान सहित आयोजन समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आसपास के गांवों से सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लेकर सत्संग का लाभ लिया।
विधिवत समापन की तैयारी
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि दो दिवसीय इस संतमत सत्संग का विधिवत समापन किया जाएगा। श्रद्धालुओं ने इस आध्यात्मिक आयोजन की सराहना करते हुए इसे सामाजिक और नैतिक चेतना के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।


