जीविका दीदियां लिख रहीं सशक्तिकरण की नई कहानी, आत्मनिर्भरता से मिली मुक्ति: श्रवण कुमार

कम्युनिटी वाइसेज कॉन्क्लेव में महिला सशक्तिकरण पर मंथन

ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जीविका से जुड़कर महिलाएं आज न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं, बल्कि अपने अधिकारों के प्रति भी पूरी तरह जागरूक हुई हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 से पहले महिलाओं और उनके बच्चों के बीमार होने पर इलाज के लिए साहूकार ही एकमात्र सहारा हुआ करता था, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी सरकार के बाद महिलाएं इस विभीषिका से मुक्त हो चुकी हैं। मंत्री पटना के गांधी मैदान स्थित ज्ञान भवन में आयोजित जीविका के ‘कम्युनिटी वाइसेज कॉन्क्लेव’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

राज्य भर से जुटीं जीविका समूह की महिलाएं
कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों से जीविका समूहों से जुड़ी महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुईं। मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जीविका ने महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल कायम की है। आज ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर बन रही हैं और उन्हें किसी के सामने हाथ फैलाने की मजबूरी नहीं है।

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से मिली नई ताकत
मंत्री ने बताया कि हाल ही में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत की गई है, जिसके तहत राज्य के एक करोड़ 56 लाख परिवारों को रोजगार शुरू करने के लिए 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई है। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं ने इस सहयोग से रोजगार शुरू किया है, उन्हें आगे उनके कार्य को विस्तार देने के लिए दो-दो लाख रुपये तक का अतिरिक्त सहयोग भी दिया जाएगा। इससे महिलाएं हर स्तर पर सशक्त बनेंगी।

स्वास्थ्य और सुपोषण पर विशेष चर्चा
ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने कहा कि बिहार में जीविका दीदियां समाज का एक बड़ा और मजबूत हिस्सा हैं। ग्रामीण इलाकों में गरीबी, स्वास्थ्य और कुपोषण सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि रसोई में सुपोषित भोजन सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं का आर्थिक रूप से सशक्त होना जरूरी है, जिसमें जीविका की योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पोषक तत्वों से भरपूर फसलों की खेती से महिलाएं कुपोषण की समस्या से स्थायी रूप से छुटकारा पा सकती हैं।

देश का सबसे बड़ा जीविका नेटवर्क बिहार में
समाज कल्याण विभाग की सचिव वंदना प्रेयसी ने कहा कि देश में जीविका का सबसे बड़ा नेटवर्क बिहार में है और बिहार ही ऐसा राज्य है, जहां सभी जिलों में जीविका दीदियों के लिए योजनाओं का संचालन हो रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना को तभी साकार किया जा सकता है, जब हर बच्चा और उसकी मां स्वस्थ हों, और यह लक्ष्य जीविका के माध्यम से ही संभव है।

उत्कृष्ट कार्य करने वाली दीदियों का सम्मान
इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली जीविका दीदियों को अतिथियों द्वारा मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में महिला स्वास्थ्य और सुपोषण से जुड़े विषयों पर परिचर्चा का भी आयोजन किया गया।

वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों की भागीदारी
कार्यक्रम को ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार की संयुक्त सचिव स्मृति शरण, स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह, समाज कल्याण विभाग की सचिव वंदना प्रेयसी, जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा, पीसीआई के कंट्री हेड इंद्रजीत, गेट्स फाउंडेशन के प्रतिनिधि सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने संबोधित किया। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने सामुदायिक संस्थाओं के प्रयासों और जीविका परियोजना की सराहना करते हुए आगे की कार्य योजना पर मार्गदर्शन दिया।

सशक्त महिलाएं, समृद्ध बिहार की दिशा
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जीविका केवल एक योजना नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव है, जो बिहार को सामाजिक और आर्थिक रूप से और सशक्त बना रही है।

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