औरंगाबाद: दाउदनगर अनुमंडलीय अस्पताल में रिश्वतखोरी का भंडाफोड़, प्रधान लिपिक 2 हजार लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

बिहार के औरंगाबाद जिले के दाउदनगर अनुमंडलीय अस्पताल में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की है। निगरानी की टीम ने अस्पताल के प्रधान लिपिक बृजमोहन लाल को 2,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह छापेमारी सोमवार को निगरानी डीएसपी आदित्य राज के नेतृत्व में छह सदस्यीय टीम द्वारा की गई, जिससे अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया।

शिकायत के बाद हुई कार्रवाई

इस कार्रवाई की शुरुआत स्टाफ नर्स अर्चना कुमारी की शिकायत से हुई थी। उन्होंने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना में आवेदन देकर आरोप लगाया था कि अटेंडेंस रजिस्टर में हाजिरी बनाने के नाम पर उनसे और उनकी सहकर्मी स्टाफ नर्स जूली से 3,000 रुपये रिश्वत मांगी जा रही है। बाद में सौदा 2,000 रुपये में तय हुआ।

शिकायत में यह भी बताया गया कि 24 अक्टूबर 2025 से 2 नवंबर 2025 तक अवकाश पर रहने के बावजूद उनका वेतन भुगतान हो चुका था, इसके बावजूद हाजिरी दर्ज करने के लिए रिश्वत की मांग की जा रही थी। निगरानी ब्यूरो ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद 15 जनवरी 2026 को निगरानी थाना में कांड संख्या 09/26 दर्ज किया गया।

ट्रैप के तहत रंगे हाथ गिरफ्तारी

शिकायत के सत्यापन के बाद निगरानी डीएसपी आदित्य राज के नेतृत्व में ट्रैप टीम का गठन किया गया। सोमवार को टीम ने दाउदनगर अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचकर प्रधान लिपिक बृजमोहन लाल के कार्यालय कक्ष में छापेमारी की। जैसे ही उन्होंने शिकायतकर्ता से 2,000 रुपये रिश्वत ली, निगरानी टीम ने उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

निगरानी अधिकारियों के अनुसार, यह वर्ष 2026 में निगरानी ब्यूरो की नौवीं प्राथमिकी और ट्रैप से जुड़ा आठवां मामला है, जो राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख को दर्शाता है।

छोटी-छोटी बातों पर ली जाती थी रिश्वत

पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि अस्पताल में लंबे समय से छोटी-छोटी राशियों में रिश्वत ली जा रही थी। छुट्टी स्वीकृत कराने, अटेंडेंस रजिस्टर पर हस्ताक्षर कराने जैसे सामान्य कार्यों के लिए भी कर्मचारियों से पैसे मांगे जाते थे। प्रधान लिपिक के पास स्थापना से जुड़े कार्य होने के कारण कर्मचारियों पर दबाव बनाना आसान हो जाता था।

निगरानी डीएसपी आदित्य राज ने बताया,
“ब्यूरो को प्राप्त शिकायत का सत्यापन कराया गया, जिसमें प्रधान लिपिक द्वारा रिश्वत मांगे जाने का प्रमाण मिला। प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर छापेमारी कर उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।”

अन्य अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप

शिकायतकर्ता स्टाफ नर्स अर्चना कुमारी ने दावा किया है कि इस अवैध वसूली में केवल प्रधान लिपिक ही नहीं, बल्कि अस्पताल मैनेजर और उपाधीक्षक की भी संलिप्तता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये अधिकारी कर्मचारियों पर पैसे देने का दबाव बनाते थे।

अर्चना कुमारी के अनुसार,
“अनुमंडलीय अस्पताल में पैसों के लेन-देन में न सिर्फ लिपिक, बल्कि हॉस्पिटल मैनेजर और उपाधीक्षक भी शामिल हैं। वे कर्मचारियों को मजबूर करते थे।”

विशेष न्यायालय में पेशी, जांच जारी

गिरफ्तार प्रधान लिपिक बृजमोहन लाल से पूछताछ के बाद उसे विशेष न्यायालय निगरानी, पटना में पेश किया जाएगा। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि मामले की आगे की जांच जारी है और अन्य संलिप्त अधिकारियों की भूमिका की भी गहन पड़ताल की जा रही है।

यह कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी ब्यूरो की जीरो टॉलरेंस नीति को मजबूती से सामने लाती है।

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