जमुई में सांसद के सामने फूट पड़ा किसानों का आक्रोश, दिशा बैठक में पहुंचकर उठाया अवैध बालू खनन का मुद्दा

बिहार के जमुई में शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अवैध बालू खनन से आक्रोशित किसान सीधे सांसद के सामने अपनी मांगें लेकर पहुंच गए। समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में दिशा (DISHA) की बैठक चल रही थी, तभी आंदोलनरत किसान वहां पहुंच गए और सांसद अरुण भारती के समक्ष बालू उठाव पर तत्काल रोक लगाने की मांग करने लगे।

अवैध बालू खनन का आरोप

किसानों का आरोप है कि गिद्धौर प्रखंड स्थित बरनार नदी के मौरा बालू घाट पर बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन किया जा रहा है। मौरा, धोबधट, प्रधानचक, निजुआरा, तिलेर समेत दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसान इस खनन से प्रभावित हैं। किसानों का कहना है कि वे 19 जनवरी से अनिश्चितकालीन धरना देने की तैयारी में हैं।

दिशा बैठक के दौरान हंगामा

जैसे ही किसानों को जानकारी मिली कि जमुई सांसद अरुण भारती, झाझा विधायक दामोदर रावत, जिलाधिकारी और अन्य वरीय अधिकारी दिशा की बैठक में मौजूद हैं, वे वहां पहुंच गए। बैठक समाप्त होते ही किसान संवाद कक्ष में दाखिल हुए और सांसद के सामने सवालों की झड़ी लगा दी। कुछ देर के लिए बैठक स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

खेती और पानी दोनों पर संकट

मौरा गांव के किसान अशोक कुमार सिंह ने बताया कि संवेदक द्वारा मनमाने ढंग से अवैध बालू खनन कराए जाने से नदी में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इससे न केवल जान-माल का खतरा बढ़ गया है, बल्कि किसानों की उपजाऊ जमीन भी बंजर होती जा रही है।
उनका कहना है कि इस समस्या से करीब 10 हजार परिवार प्रभावित हो रहे हैं।

“जहां से अवैध बालू खनन हो रहा है, वहां से दस पैन निकलती हैं, जिनसे दस से अधिक गांवों के खेतों तक पानी पहुंचता है। खनन के कारण पानी का लेयर नीचे चला गया है, पैन निष्क्रिय हो गई है। खेतों में पानी नहीं पहुंच रहा है। चापाकल और बोरिंग फेल होने लगे हैं। आगे चलकर पीने के पानी का भी संकट खड़ा हो सकता है।”
— अशोक कुमार सिंह, किसान

सांसद का आश्वासन

किसानों के आक्रोश के बीच सांसद अरुण भारती ने उन्हें शांत कराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी गलत तरीके से खनन हो रहा है, तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी। सांसद ने किसानों से लिखित शिकायत देने की अपील की और कहा कि इस मुद्दे को दिशा की बैठक में भी उठाया गया है।

“खनन विभाग से पूछा गया है कि क्या नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। नए खनन शुरू करने से पहले सर्वे कराया गया था या नहीं, और कहीं अवैध खनन तो नहीं हुआ है—इन सभी बिंदुओं पर जांच होगी। अगले 30 दिनों के भीतर 29 घाटों से जुड़ी प्राथमिक रिपोर्ट आ जाएगी। यदि रिपोर्ट में कहीं भी गलत जानकारी पाई गई, तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी।”
— अरुण भारती, सांसद, जमुई

आगे क्या?

फिलहाल किसानों का कहना है कि जब तक अवैध बालू खनन पर रोक नहीं लगती और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं प्रशासन और जनप्रतिनिधि जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिला रहे हैं।

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