पूर्वी चंपारण। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर में आज एक ऐतिहासिक और भव्य धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। यहां विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग का अभिषेक सात पवित्र नदियों के जल से किया गया। यह आयोजन हिंदू धर्म की प्राचीन परंपराओं और आस्था का प्रतीक माना जा रहा है।
अभिषेक में गंगा, यमुना, सरस्वती, सिंधु, नर्मदा, कावेरी और गंडक नदियों के पवित्र जल का उपयोग किया गया। इन जलों को कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, यमुनोत्री, प्रयागराज, सोनपुर और रामेश्वरम जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों से विशेष रूप से मंगाया गया था।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रहे मुख्य अतिथि
इस भव्य कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने शिवलिंग के अभिषेक के बाद मंदिर परिसर में प्रस्तावित गौशाला, संस्कृत विद्यालय और पर्यटन सुविधाओं का शिलान्यास भी किया।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा समेत कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और धर्माचार्य मौजूद रहे। आयोजन को सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बताया गया।
33 फुट ऊंचा, 210 टन वजनी सहस्त्रलिंगम
मंदिर परिसर में स्थापित यह सहस्त्रलिंगम शिवलिंग
- ऊंचाई: 33 फुट
- वजन: लगभग 210 टन
- सामग्री: काले ग्रेनाइट का एक ही शिला खंड
यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम में तैयार किया गया और करीब 2500 किलोमीटर की दूरी तय कर 45 दिनों में बिहार लाया गया। आयोजकों के अनुसार, यह शिवलिंग कैलाश पर्वत से प्रेरित है और इसका अभिषेक समस्त सृष्टि के कल्याण की भावना से किया गया।
108 कलशों से किया गया अभिषेक शिव के 108 नामों का भी प्रतीक माना जाता है।
सात नदियों के जल का विशेष धार्मिक महत्व
हिंदू शास्त्रों में इन सात नदियों को अत्यंत पवित्र माना गया है—
- गंगा: मोक्षदायिनी
- यमुना: पापहरिणी
- सरस्वती: ज्ञानदायिनी
- सिंधु: प्राचीन सभ्यता की साक्षी
- नर्मदा: रक्षक
- कावेरी: दक्षिण की गंगा
- गंडक: बिहार की जीवनरेखा
अभिषेक से पहले जल को विशेष शुद्धिकरण प्रक्रिया से गुजारा गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजा संपन्न हुई।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित रामेश्वर दास ने कहा—
“यह शिवलिंग कैलाश पर्वत से प्रेरित है और सात नदियों के जल से इसका अभिषेक समस्त सृष्टि के कल्याण की कामना के लिए किया गया है।”
एशिया का सबसे भव्य धार्मिक परिसर
विराट रामायण मंदिर लगभग 120 एकड़ में फैला हुआ है और इसे एशिया के सबसे बड़े मंदिर परिसरों में से एक माना जा रहा है।
- मुख्य मंदिर की ऊंचाई: 270 फुट
- कुल 18 शिखर और 22 मंदिर
- रामायण की पूरी कथा को भव्य मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया जाएगा
इस परियोजना का निर्माण 2022–23 से शुरू हुआ है और इसका संचालन महावीर मंदिर ट्रस्ट कर रहा है। पूरा होने पर यह स्थल अयोध्या और काशी की तरह एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र बनेगा।
भक्तों में भारी उत्साह
सुबह मंगला आरती से कार्यक्रम की शुरुआत हुई और दोपहर में मुख्य अभिषेक संपन्न हुआ।
- 100 से अधिक पंडितों ने अनुष्ठान कराया
- लाखों श्रद्धालु बिहार और अन्य राज्यों से पहुंचे
- सुरक्षा के लिए करीब 2000 पुलिसकर्मी तैनात रहे
रात्रि में महाआरती और भंडारे का आयोजन किया गया। पूरे कार्यक्रम का ड्रोन से लाइव प्रसारण यूट्यूब और दूरदर्शन पर किया गया।
विकास और पर्यटन की नई उम्मीद
यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि बिहार के सांस्कृतिक पुनरुत्थान और आर्थिक विकास का भी संकेत माना जा रहा है। मंदिर के पूर्ण होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और हजारों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।


