पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद पिछले करीब दो महीने से राजनीतिक गतिविधियों से दूर नजर आ रहे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अब एक बार फिर सक्रिय होते दिख रहे हैं। सोमवार को उन्होंने पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में आरजेडी सांसदों के साथ समीक्षा बैठक की। हालांकि, इस बैठक को लेकर उनकी बहन और पूर्व आरजेडी प्रत्याशी रोहिणी आचार्य ने तीखा हमला बोला है।
रोहिणी आचार्य का तंज
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर तेजस्वी यादव की समीक्षा बैठक को “दिखावा” करार दिया। उन्होंने लिखा कि समीक्षा बैठकों से ज्यादा जरूरी है आत्ममंथन करना और हार की जिम्मेदारी लेना। साथ ही उन्होंने पार्टी के भीतर प्रभावशाली नेताओं पर इशारों में निशाना साधते हुए कड़े फैसले लेने की सलाह दी।
रोहिणी आचार्य ने लिखा—
“समीक्षा का दिखावा करने से ज्यादा जरूरी खुद आत्म-मंथन करने और जिम्मेदारी लेने की है। अपने इर्द-गिर्द कब्जा जमाए बैठे चिन्हित गिद्धों को ठिकाने लगाने का साहस दिखाने के बाद ही किसी भी प्रकार की समीक्षा की सार्थकता साबित होगी। बाकी तो ये जो पब्लिक है न, वो सब जानती-समझती ही है।”
तेजस्वी यादव ने की सांसदों के साथ बैठक
पटना स्थित आरजेडी प्रदेश कार्यालय में हुई इस बैठक में तेजस्वी यादव के साथ पार्टी के सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसद मौजूद रहे। बैठक में मीसा भारती, राज्यसभा सांसद संजय यादव समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस दौरान चुनावी हार की समीक्षा और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की गई।
25 सीटों पर सिमटी आरजेडी
2025 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। पार्टी ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 144 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन केवल 25 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी। यह 2010 के बाद आरजेडी का सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है, जब पार्टी को 22 सीटें मिली थीं।
पहले से नाराज चल रही हैं रोहिणी
रोहिणी आचार्य चुनाव से पहले से ही पार्टी नेतृत्व से नाराज बताई जाती रही हैं। हालांकि उन्होंने चुनाव के दौरान पार्टी उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया था, लेकिन हार के बाद से वे लगातार मुखर हैं।
15 नवंबर को उन्होंने सोशल मीडिया पर राजनीति छोड़ने और परिवार से नाता तोड़ने तक का ऐलान कर दिया था। उन्होंने अपने साथ हुई कथित ज्यादती के लिए तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव और रमीज को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद से उनके पोस्ट लगातार पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
पार्टी में बढ़ता अंतर्विरोध
तेजस्वी यादव की सक्रियता और रोहिणी आचार्य की खुली नाराजगी ने एक बार फिर आरजेडी के अंदरूनी मतभेदों को सतह पर ला दिया है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि तेजस्वी यादव इस आलोचना को कैसे लेते हैं और क्या पार्टी में कोई बड़ा संगठनात्मक बदलाव होता है या नहीं।


