ऊर्जा सचिव का औचक निरीक्षण, मझौलिया ग्रिड और माधोपुर उपकेंद्र को लेकर दिए सख्त निर्देश

पटना। बिहार में बिजली आपूर्ति को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में ऊर्जा विभाग ने रफ्तार बढ़ा दी है। ऊर्जा सचिव सह बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक ने शुक्रवार को पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया अंतर्गत मझौलिया प्रखंड में निर्माणाधीन 132/33 केवी ग्रिड उपकेंद्र और माधोपुर विद्युत शक्ति उपकेंद्र का औचक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान ऊर्जा सचिव ने स्पष्ट कहा कि मझौलिया ग्रिड उपकेंद्र के चालू होने के बाद क्षेत्र में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे लाइन लॉस में कमी आएगी और तकनीकी समस्याओं का भी स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।

उन्होंने बताया कि फिलहाल इस इलाके को मोतिहारी, रक्सौल और बेतिया ग्रिड उपकेंद्रों से बिजली मिल रही है। लंबी दूरी की ट्रांसमिशन लाइनों के कारण उपभोक्ताओं को बार-बार वोल्टेज फ्लक्चुएशन और आपूर्ति बाधित होने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नए ग्रिड के निर्माण से 33 केवी लाइनों की लंबाई घटेगी और सप्लाई सिस्टम अधिक मजबूत होगा।

145.98 करोड़ की बड़ी परियोजना
परियोजना के तहत 132 केवी डबल सर्किट रक्सौल–अमवामन संचरण लाइन और रक्सौल ग्रिड उपकेंद्र में 132 केवी की दो ‘बे’ का निर्माण किया जा रहा है। इस पूरी परियोजना पर करीब 145.98 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके पूरा होते ही मझौलिया प्रखंड सहित आसपास के क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

माधोपुर उपकेंद्र में व्यवस्थाओं की जांच
ऊर्जा सचिव ने मझौलिया के माधोपुर स्थित विद्युत शक्ति उपकेंद्र का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने क्षेत्रीय कार्यालयों से स्क्रैप हटाने के लिए अंचल कार्यालय को “शक्ति प्रदत्त” करने, प्रिवेंटिव मेंटेनेंस के लिए प्रिंटेड रजिस्टर को अद्यतन रखने और फ्यूज कॉल सेंटर पर पंचायत स्तर के लाइनमैन का नाम व मोबाइल नंबर प्रदर्शित करने का निर्देश दिया।

इसके साथ ही लाइव लाइन पर कार्य के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने, सभी सेफ्टी इक्विपमेंट्स के अनिवार्य उपयोग और उपकेंद्र के समुचित रखरखाव को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश दिए गए। ऊर्जा सचिव ने कहा कि बिजली आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों का त्वरित समाधान और सुरक्षा मानकों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है।

ऊर्जा विभाग का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से पश्चिम चंपारण क्षेत्र में बिजली व्यवस्था न सिर्फ मजबूत होगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी।

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