23 जनवरी को सरस्वती पूजा, पटना में राजस्थानी कारीगरी की मूर्तियों की बढ़ी मांग

23 जनवरी को मनाई जाने वाली सरस्वती पूजा को लेकर बिहार में तैयारियां तेज हो गई हैं। राजधानी पटना में इस बार राजस्थान से आए कलाकारों द्वारा बनाई गई मां सरस्वती की मूर्तियां लोगों की पहली पसंद बन रही हैं। छोटी-बड़ी, रंग-बिरंगी और आकर्षक प्रतिमाएं बाजार में खासा ध्यान खींच रही हैं।

राजस्थानी कारीगरी बनी लोगों की पसंद

पटना के विभिन्न इलाकों में मूर्तिकार दिन-रात मां सरस्वती की प्रतिमा तैयार करने में जुटे हुए हैं। इस वर्ष पारंपरिक मिट्टी की मूर्तियों के साथ-साथ राजस्थानी मूर्तिकारों द्वारा बनाई गई प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियां भी बाजार में उपलब्ध हैं, जो अपनी अलग कलाकारी और हल्के वजन के कारण काफी लोकप्रिय हो रही हैं।

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बनावट और रंगों पर खास ध्यान

नेहरू पथ, गोल रोड, अनीसाबाद और सगुनामोड़ जैसे इलाकों में अस्थायी टेंट लगाकर राजस्थान से आए कलाकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं। मूर्तियों की बनावट, रंग संयोजन और बारीक डिजाइन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

राजस्थानी मूर्तिकार शारदा बताती हैं कि उनकी बनाई प्रतिमाओं को खरीदने के लिए लोग दूर-दराज से पहुंच रहे हैं।

“छोटी मूर्तियां कम कीमत में उपलब्ध हैं, जबकि बड़ी मूर्तियों की कीमत 1200 से 1500 रुपये तक है। विशेष डिजाइन और बड़ी मूर्तियों की कीमत 5000 से 8000 रुपये तक जाती है।”

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POP मूर्तियों की खासियत

मूर्तिकार भीमा के अनुसार, प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियां हल्की होने के कारण आसानी से ढोई जा सकती हैं और इनमें बारीक डिजाइन उकेरना भी आसान होता है।

“एक मूर्ति तैयार करने में 15 से 30 मिनट का समय लगता है। जल्दी सूखने और रंग अच्छी तरह चढ़ने के कारण एक दिन में 5 से 6 मूर्तियां बनाई जा सकती हैं।”

दूर-दराज से पहुंच रहे खरीदार

इन मूर्तियों की खरीदारी के लिए न केवल पटना शहर, बल्कि हाजीपुर, वैशाली, जहानाबाद और आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी लोग पहुंच रहे हैं।

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आकार के अनुसार कीमत

मूर्तिकार धनराज बताते हैं कि मूर्तियों की कीमत उनके आकार और डिजाइन पर निर्भर करती है।

  • छोटी मूर्तियां: 300 से 5000 रुपये
  • बड़ी मूर्तियां: 10,000 से 12,000 रुपये
  • कस्टमाइज मूर्तियों की भी बढ़ी मांग

“फार्मा के जरिए मूर्ति बनाई जाती है। सूखने के बाद फिनिशिंग और रंग-रोगन कर उसे अंतिम रूप दिया जाता है।”

मूर्तिकारों की चुनौतियां

मूर्तिकारों का कहना है कि महंगाई के कारण कच्चे माल और रंगों की कीमत बढ़ गई है, जिससे लागत में इजाफा हुआ है। इसके बावजूद वे ग्राहकों को उचित दाम पर मूर्तियां उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं।

पर्यावरण को लेकर चेतावनी

नोट: वॉइस ऑफ बिहार प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों को प्रोत्साहित नहीं करता। पीओपी से बनी मूर्तियां पर्यावरण के लिए हानिकारक होती हैं, क्योंकि विसर्जन के बाद इन्हें पानी में घुलने में अधिक समय लगता है और इससे जल प्रदूषण बढ़ता है।


 

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