भागलपुर: भागलपुर जिले के शाहकुंड प्रखंड स्थित मोद नारायण इंटर स्तरीय विद्यालय एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। विद्यालय पर शैक्षणिक अव्यवस्था, शिक्षकों की मनमानी और कथित भ्रष्टाचार को लेकर छात्र, अभिभावक और स्थानीय लोग गंभीर आरोप लगा रहे हैं। आरोप है कि पर्याप्त संख्या में शिक्षक पदस्थापित होने के बावजूद विद्यालय में नियमित पढ़ाई नहीं हो रही है।
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि कई शिक्षक केवल उपस्थिति दर्ज कर विद्यालय से अनुपस्थित हो जाते हैं, जिसके कारण कक्षाएं संचालित नहीं हो पातीं और विद्यार्थियों को बिना पढ़ाई के ही घर लौटना पड़ता है। इससे छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। लोगों का आरोप है कि विद्यालय में शैक्षणिक माहौल पूरी तरह चरमरा गया है और सरकारी शिक्षा सुधार के दावे यहां धरातल पर नजर नहीं आते।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि विद्यालय के प्राचार्य श्री खुर्शीद आलम का शिक्षकों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं है, अथवा इन गतिविधियों की अनदेखी की जा रही है। इसी कारण विद्यालय में अनुशासनहीनता की स्थिति बनी हुई है।
प्रैक्टिकल परीक्षा के नाम पर अवैध वसूली का आरोप
सबसे गंभीर आरोप प्रैक्टिकल परीक्षा को लेकर लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि मोद नारायण इंटर स्कूल एवं इससे संबद्ध छह अन्य विद्यालयों के लगभग 250 से अधिक छात्रों से प्रति छात्र 300 रुपये की वसूली की जा रही है। आरोप है कि यह राशि प्रैक्टिकल में पास कराने के नाम पर ली जा रही है। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि जब नियमित पढ़ाई ही नहीं हुई, तो छात्र प्रैक्टिकल परीक्षा देने के लिए तैयार नहीं हैं, इसके बावजूद उनसे पैसे लिए जा रहे हैं। अनुमान के अनुसार यह कथित वसूली लाखों रुपये तक पहुंच सकती है।
प्रशासनिक पक्ष
मामले को लेकर जब विद्यालय के प्राचार्य से संपर्क किया गया तो उन्होंने प्रारंभ में आरोपों से इनकार किया, लेकिन बाद में कुछ खामियों को स्वीकार करते हुए जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। वहीं, इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
इधर, विद्यालय की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। लोगों ने जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।


