पटना। मकर संक्रांति के अवसर पर 14 जनवरी को जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया। कार्यक्रम में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति भी रखी गई थी, जिसके लिए मंच बनाया गया और गायकों को आमंत्रित किया गया।
इसी कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जब एक महिला सिंगर “यादव जी वाला” गीत गा रही होती है, तब तेज प्रताप यादव मंच से हस्तक्षेप करते हुए उसे रोकते हैं। वे कहते हैं—
“ऐ सुनो, बंद करो ये सब… पूजा-पाठ वाला गाना गाओ। वल्गर गाना मत गाओ। भगवान वाला गाना गाओ। खाली यादव जी वाला ही क्यों, कृष्ण भगवान का भजन गाओ।”
महिला सिंगर को कथित रूप से अश्लील गीत गाने से रोकने के इस कदम पर सोशल मीडिया पर तेज प्रताप यादव की सराहना की जा रही है। कई यूजर्स ने इसे सार्वजनिक मंच पर मर्यादा बनाए रखने की पहल बताया है।
कई प्रमुख नेता रहे मौजूद
जिस समय यह घटना हुई, उस दौरान कार्यक्रम में लालू प्रसाद यादव, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, प्रभुनाथ यादव, साधु यादव और विधायक चेतन आनंद भी मौजूद थे। हालांकि, लालू यादव के छोटे बेटे और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
तेजस्वी का इंतजार करते रहे तेज प्रताप
तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने तेजस्वी यादव का रात 9 बजे तक इंतजार किया। पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा,
“तेजस्वी देर से सोते हैं, आ ही रहे होंगे।”
लेकिन तय समय तक न तो तेजस्वी यादव कार्यक्रम में पहुंचे और न ही तेज प्रताप के आवास पर उनसे मिलने आए।
कार्यक्रम में राबड़ी देवी भी शामिल नहीं हुईं। इस पर तेज प्रताप यादव ने कहा कि संभव है कि “जयचंदों” ने तेजस्वी को आने से रोका हो।
साथ दिखे लालू-तेज प्रताप, अटकलें तेज
गौरतलब है कि पार्टी और परिवार से अलगाव के बाद 14 जनवरी को यह पहला मौका था, जब लालू प्रसाद यादव और तेज प्रताप यादव किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में साथ नजर आए। तेज प्रताप के भोज में लालू यादव की मौजूदगी के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि पिता-पुत्र के बीच रिश्तों में नरमी आई है।
हालांकि, तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी और परिवार के अन्य सदस्यों का कार्यक्रम से दूर रहना यह संकेत भी देता है कि पारिवारिक और राजनीतिक समीकरण अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।


