क्या तेज प्रताप बदलेंगे सियासी पाला? ‘भविष्य में सब पता चल जाएगा’— तेज प्रताप की एंट्री पर विजय सिन्हा का बयान

पटना। मकर संक्रांति के अवसर पर बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने अपने पटना स्थित सरकारी आवास पर पारंपरिक दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया। इस भोज में एनडीए के कई बड़े नेता, मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता शामिल हुए।

इस कार्यक्रम में उस वक्त राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं, जब राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव भी भोज में पहुंचे। उनके पहुंचते ही राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया।

भोज में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत कई वरिष्ठ मंत्री और नेता मौजूद थे। तेज प्रताप यादव की मौजूदगी को लेकर लोगों में यह चर्चा होने लगी कि क्या वे एनडीए में शामिल होने वाले हैं। नीतीश सरकार के दो मंत्रियों ने तो यहां तक कहा कि अगर तेज प्रताप यादव एनडीए में आते हैं, तो उनका स्वागत किया जाएगा।

विजय सिन्हा और तेज प्रताप के बयान

तेज प्रताप यादव के एनडीए में शामिल होने के सवाल पर डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने कहा,
“आने वाले समय में सब पता चल जाएगा। हमारा लक्ष्य ‘एक बिहारी सब पर भारी’ की भावना को मजबूत करना है।”

वहीं तेज प्रताप यादव ने भी सधे हुए अंदाज में कहा,
“सब कुछ समय पर पता चल जाएगा, अभी क्यों बताना है। दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण मिला था, हम अपना धर्म निभाने आए हैं। नेता लोग मिलते-जुलते रहते हैं, राजनीति अलग बात है।”

14 जनवरी को तेज प्रताप का भोज

गौरतलब है कि 14 जनवरी को तेज प्रताप यादव भी अपने आवास पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने विजय कुमार सिन्हा सहित एनडीए और महागठबंधन के कई नेताओं को आमंत्रण भेजा है।

भोज की तैयारियों के बीच तेज प्रताप यादव ने पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा कल्याण मंत्री रमा निषाद, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन, और उद्योग एवं पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल से मुलाकात कर उन्हें व्यक्तिगत रूप से निमंत्रण पत्र सौंपा।

तेज प्रताप पहले भी दोनों गठबंधनों के कई नेताओं को आमंत्रण दे चुके हैं। ऐसे में अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मकर संक्रांति पर तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में कौन-कौन से नेता शामिल होते हैं, क्योंकि इससे बिहार की राजनीति को लेकर नए संकेत मिल सकते हैं।

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