पटना/गया। बिहार में वर्ष 2024 से चल रहे भूमि सर्वे कार्य में आ रही लगातार परेशानियों को देखते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने नया समाधान निकाला है। विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट मॉडल लागू करने का निर्णय लिया है, ताकि सर्वे से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं को एक जगह समझकर उसका स्थायी समाधान किया जा सके।
अतरी अंचल बना पायलट प्रोजेक्ट का केंद्र
इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए गया जिले के अतरी अंचल का चयन किया गया है। यहां एक साथ पूरे अंचल के सभी मौजों (रेवेन्यू विलेज) में भूमि सर्वे का कार्य किया जाएगा।
क्या है पायलट प्रोजेक्ट मॉडल
पायलट प्रोजेक्ट के तहत:
- एक अंचल में एक साथ सभी मौजों का सर्वे होगा
- अतरी अंचल के 62 मौजों में एक साथ सर्वे कार्य शुरू किया जाएगा
- इसके लिए 62 अमीन और 4–5 कानूनगो की तैनाती की जाएगी
- लक्ष्य है कि एक वर्ष के भीतर पूरा अंचल सर्वे से आच्छादित हो जाए
“अतरी अंचल में एक साथ पूरे क्षेत्र का सर्वे शुरू किया जाएगा। अगर यह मॉडल सफल रहता है और समय से पहले पूरा होता है, तो इसे अन्य अंचलों में भी लागू किया जाएगा।”
— मुकेश कुमार, जिला बंदोबस्त पदाधिकारी, गया
अन्य क्षेत्रों में भी जारी रहेगा सर्वे
पायलट प्रोजेक्ट के अलावा राज्य के अन्य अंचलों में भी भूमि सर्वे का कार्य पहले से उपलब्ध संसाधनों के आधार पर चलता रहेगा। हालांकि, पायलट प्रोजेक्ट में लगाए गए कर्मचारी केवल उसी अंचल पर फोकस करेंगे।
व्यावहारिक दिक्कतों की होगी पहचान
अधिकारियों के अनुसार, एक अंचल में पूरे सर्वे को एक साथ करने से:
- जमीनी स्तर की समस्याएं स्पष्ट होंगी
- नियमों में संशोधन की आवश्यकता का आकलन होगा
- राज्य स्तर पर सुधार की ठोस रिपोर्ट तैयार की जा सकेगी
व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर
पायलट प्रोजेक्ट के दौरान भूमि सर्वे से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों, प्रक्रिया और नियमों की जानकारी व्यापक स्तर पर दी जाएगी। इससे आसपास के अंचलों और जिलों में लोगों को पहले से जागरूक किया जा सकेगा, जिससे भविष्य में सर्वे कार्य आसान होगा।
सर्वे में आएगी तेजी
जिला बंदोबस्त पदाधिकारी ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट से भूमि सर्वे की गति तेज होगी। अतरी अंचल में करीब 70 अमीन, कानूनगो और अन्य कर्मियों की तैनाती की गई है। गया जिले में भूमि सर्वे का कार्य अगस्त 2024 से चल रहा है।
भूमि विवाद खत्म करना है उद्देश्य
बिहार में भूमि सर्वे का मुख्य उद्देश्य:
- दशकों पुराने भूमि विवादों का समाधान
- जमीन के मालिकाना हक को स्पष्ट करना
- पुराने दस्तावेजों की जगह डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना
वर्तमान में राज्य के 60–70 प्रतिशत दीवानी और आपराधिक मामले भूमि विवाद से जुड़े हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने भूमि सर्वे पूरा करने की अंतिम समय-सीमा दिसंबर 2026 तय की है।


