पटना। पटना हाईकोर्ट ने मधेपुरा जिले में नाबालिग छात्र के दो माह तक अवैध रूप से जेल में रखे जाने के मामले में राज्य सरकार को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ ने इस गिरफ्तारी को असंवैधानिक करार देते हुए पुलिस और मजिस्ट्रेट की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।
मामला क्या था
मामला मधेपुरा जिले में दो समूहों के बीच मारपीट से जुड़ा है। मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद 23 अक्टूबर 2025 को पुलिस ने नाबालिग को गिरफ्तार किया। एफआईआर में उसकी उम्र 19 साल बताई गई, जबकि वह वास्तव में 15 साल का था।
नाबालिग को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया, लेकिन उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला और चार्जशीट दाखिल नहीं की गई। इस तरह वह दो माह तक जेल में रहा, जबकि कानून के अनुसार नाबालिगों के लिए विशेष प्रावधान हैं।
कोर्ट का आदेश और तर्क
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि:
- राज्य सरकार पीड़ित छात्र को 5 लाख रुपये मुआवजा दे।
- मुआवजे की राशि दोषी अधिकारियों से वसूली जाए।
- मुकदमे में खर्च के रूप में 15,000 रुपये याचिकाकर्ता को अलग से दिए जाएं।
- पुलिस महानिदेशक से निर्देश कि लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
कोर्ट ने कहा,
“अदालत संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और मूक दर्शक नहीं रह सकता। एक अधिकारी ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया। मजिस्ट्रेट भी छात्र की स्वतंत्रता की रक्षा करने में विफल रहे।”
नाबालिग अधिकारों की रक्षा की मिसाल
पटना हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नाबालिगों की गिरफ्तारी और जेल भेजना बेहद संवेदनशील मामला है। इस फैसले से स्पष्ट संदेश गया कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी कानून और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकते।
“जेल में दो माह तक अवैध रूप से रखने पर यह कार्रवाई नाबालिगों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में अहम कदम है।”


