पटना। बिहार में स्लीपर बसों के संचालन, निर्माण और मॉडिफिकेशन को लेकर परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सीटर बसों को अनधिकृत तरीके से स्लीपर या मिक्स्ड सीटर-स्लीपर कॉन्फिगरेशन में चलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे सभी वाहनों का परमिट तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाएगा।
सीटर बसों को स्लीपर बनाने का मामला उजागर
परिवहन मंत्री ने बताया कि हाल ही में कटिहार दौरे के दौरान मिली शिकायतों और कराई गई जांच में यह सामने आया है कि कई बसें सीटर के रूप में पंजीकृत हैं, लेकिन उन्हें अवैध रूप से स्लीपर में बदलकर अंतरराज्यीय रूट पर चलाया जा रहा है। यह यात्रियों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है और केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली, 1989 के नियम 126 के साथ-साथ AIS-052 और AIS-119 मानकों का सीधा उल्लंघन है।
स्लीपर बसों के लिए अनिवार्य मानक
परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि स्लीपर बसों का निर्माण, निरीक्षण और संचालन केवल AIS-052 (बस बॉडी कोड) और AIS-119 (स्लीपर कोच मानक) के अनुरूप ही किया जा सकता है। इन मानकों के तहत—
- निर्धारित बर्थ साइज (1800 मिमी लंबाई, 600 मिमी चौड़ाई)
- आपातकालीन निकास
- फायर रेसिस्टेंट मटीरियल
- अधिकृत एजेंसी से प्रोटोटाइप प्रमाणन
अनिवार्य होगा।
फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट जारी करने से पहले बस की भौतिक जांच भी की जाएगी।
कटिहार–सिलीगुड़ी रूट पर ज्यादा अनियमितताएं
परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा,
“बिहार से संचालित कई ओवरनाइट बसें एसी सीटर परमिट के बावजूद मॉडिफाइड स्लीपर मोड में चल रही हैं। इससे आग लगने, ओवरलोडिंग और आपातकालीन निकास बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से कटिहार–सिलीगुड़ी रूट पर इस तरह की गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।”
परमिट रद्द और जिम्मेदारों पर कार्रवाई
मंत्री ने दो टूक कहा कि भविष्य में जो भी सीटर बस स्लीपर में बदली हुई पाई जाएगी, उसका परमिट रद्द किया जाएगा। नियमों की अनदेखी करने वाले बस ऑपरेटरों के साथ-साथ संबंधित आरटीओ अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों पर भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
केवल मान्यता प्राप्त फैक्ट्रियों में होगा निर्माण
हाल के दिनों में स्लीपर बसों में आग लगने की घटनाओं को देखते हुए विभाग ने नए सख्त प्रावधान लागू किए हैं। अब स्लीपर बसों का निर्माण केवल मान्यता प्राप्त ऑटोमोबाइल कंपनियों या केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत फैक्ट्रियों में ही किया जा सकेगा। स्थानीय या अनधिकृत बॉडी बिल्डरों को इसकी अनुमति नहीं होगी।
ड्राइवर की नींद पर नजर रखेगा अलर्ट सिस्टम
हर स्लीपर बस में—
- फायर डिटेक्शन सिस्टम
- एआई आधारित ड्राउजिनेस अलर्ट सिस्टम
- इमरजेंसी एग्जिट हैमर
- इमरजेंसी लाइट्स
- स्पष्ट और मल्टी-पॉइंट एग्जिट सिस्टम
अनिवार्य किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पुरानी बसों में भी रेट्रोफिटिंग जरूरी
परिवहन मंत्री ने कहा कि पहले से संचालित स्लीपर बसों में भी इन सभी सुरक्षा सुविधाओं की रेट्रोफिटिंग अनिवार्य होगी। इसके लिए परिवहन विभाग जल्द ही व्यापक जांच अभियान शुरू करेगा।
सरकार का साफ संदेश है कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


